डिजिटल डेस्क, गुरुग्राम: संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार शाम गुरुग्राम के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की। इस दौरान किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 10 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
प्रतिनिधिमंडल ने यह रखी 10 मांगें
1- व्यापार समझौते से खेती बाहर रहे: भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछलीपालन सेक्टर को शामिल न किया जाए।
2- MSP गारंटी कानून बने: सभी किसानों की सभी फसलों की खरीद MSP पर सुनिश्चित करने के लिए कानून लाया जाए। 2011 में प्रधानमंत्री को दी गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि MSP से नीचे खरीद पर रोक के लिए वैधानिक प्रावधान जरूरी है।
3- C2+50% फार्मूले से MSP: स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए। 2006 में आयोग ने C2 लागत में 50% जोड़कर MSP देने की सिफारिश की थी, जो आज तक लागू नहीं हुई।
4- संपूर्ण कर्जा माफी: मोर्चा ने कहा कि उचित MSP न मिलने से किसान कर्जदार हुए हैं। OECD की रिपोर्ट के अनुसार 2000-17 में 45 लाख करोड़ और 2022-23 में 12.55 लाख करोड़ का नुकसान किसानों को हुआ। 2020-21 में ही किसानों पर 18.4 लाख करोड़ रुपये का बकाया कर्ज था।
5- 2013 वाला भूमि अधिग्रहण कानून बहाल हो: जमीन लेने से पहले 75% किसानों की लिखित सहमति, मार्केट रेट से 4 गुना मुआवजा और प्राथमिकता पर बंजर भूमि के अधिग्रहण का प्रावधान फिर लागू हो।
6- हाईटेंशन लाइन का 4 गुना मुआवजा: इसके लिए राष्ट्रीय नीति बने, मार्केट वैल्यू निकालने का लॉटरी सिस्टम खत्म हो और किसानों के वैल्युएटर को प्रक्रिया में शामिल किया जाए। गांवों में भी Right of Way का 60% मुआवजा मिले, जो अभी सिर्फ 30% है।
7- गन्ने का FRP 600 रुपये हो: गन्ने का FRP कम से कम 600 रुपये क्विंटल घोषित हो और 14 दिन में भुगतान न होने पर 12-15% ब्याज अतिरिक्त मिले।
8- फसल बीमा योजना बदले: जलवायु परिवर्तन व बाढ़-सूखे से हो रहे नुकसान के लिए राष्ट्रीय नीति बने। वर्तमान फसल बीमा योजना से कॉरपोरेट को फायदा हो रहा है, इसे किसान हितैषी बनाया जाए।
9- किसान की सहमति के बिना कोई बिल नहीं: बीज बिल और विद्युत संशोधन बिल किसानों की व्यापक सहमति के बगैर लागू न किए जाएं।
10- आंदोलन के मुकदमे रद्द हों: किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
मुलाकात में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में तमिलनाडु से पीआर पांड्यन, कर्नाटक से महेश बेलगावंकर (कुर्बुरु शांताकुमार के प्रतिनिधि), मध्यप्रदेश से लीलाधर राजपूत, गुजरात से गजेंद्र झाला, राजस्थान से इंद्रजीत पन्नीवाला, पंजाब से सतनाम सिंह बेहरु व सुखदेव सिंह भोजराज, हरियाणा से राजिंदर सिंह चहल, हर्षदीप सिंह और अभिमन्यु कोहाड़ तथा उत्तर प्रदेश से प्रहलाद पूनिया व सोनवीर चौधरी मौजूद रहे।

