आइए जानते हैं कौन ले सकता है विदेश से चंदा, क्या कहता है FCRA का नियम?

डिजिटल डेस्क । विदेश अंशदान संशोधन बिल 12 अगस्त को संसद में पेश हो सकता है, हालांकि बिल पास होने के बाद उसी तारीख से लागू नहीं होगा। इस दौरान हर नागरिक के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिरी FCRA बिल है क्या और इसके तहत कौन किस तरह से विदेश से चंदा ले सकता है। आखिर भारत में कौन कानूनी तौर पर विदेशी फंड को ले सकेगा। बता दें कि फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट, या FCRA भारत में विदेशी योगदान और विदेशी मेहमाननवाजी को स्वीकार करने और उनके उपयोग को रेगुलेट करता है। इसका मकसद है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल इस तरह से ना हो जिससे भारत की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, जनहित या फिर लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बुरा असर पड़े। यह कानून सभी तरह की विदेशी फंडिंग पर रोक नहीं लगाता है। योग्य व्यक्ति, एसोसिएशन और संगठन विदेशी योगदान ले सकते हैं, लेकिन उन्हें कानून के तहत तय रजिस्ट्रेशन, मंजूरी, बैंकिंग, रिपोर्टिंग और इस्तेमाल से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना होगा। यदि कोई कानून के खिलाफ जाकर चंदा लेता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान बनाया गया है। जानकारी के लिए बता दें कि यह कानून राजनीतिक दल और उनके पदाधिकारी, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार, सांसद, विधायक, जज और सरकारी कर्मचारियों को चंदा लेने से रोकता है। इसके अलावा सरकारी कार्पोरेशन और राजनीतिक प्रकृति वाले संगठने भी विदेशी ,चंदा नहीं ले सकते हैं। वहीं इन नियमों में कुछ मीडिया प्रोफेशनल जिनमें रजिस्टर्ड अखबारों के एडिटर, मालिक, पब्लिशर, कार्टूनिस्ट, कॉलमिस्ट और कॉरेस्पॉडेंट चंदा नहीं ले सकेंगे। इन्हें भी लागू नियमों के तहत विदेशी योगदान लेने से रोका गया है। इन पाबंदियों का मकसद विदेशी पैसे को चुनावों, सरकारी फैसले लेने की प्रक्रिया, न्यायिक कामकाज, राजनीतिक गतिविधि या मीडिया को प्रभावित करने से रोकना है। FCRA नियमों के तहत प्रशासनिक खर्चों में आम तौर पर सीमा मिले हुए विदेशी योगदान का 20 प्रतिशत होता है, जो कानूनी नियमों और मंजूर अपवादों के अधीन है। प्रशासनिक खर्चों में सैलरी, ऑफिस के खर्च और संगठन के दूसरे ऊपरी खर्च शामिल हो सकते हैं। इस पाबंदी का मकसद इस बात को पक्का करना है कि विदेशी दान का इस्तेमाल मुख्य रूप से उन्हीं चीजों के लिए हो जिनके लिए वह मिले थे।
FCRA में पंजीकरण के लिए यह है जरूरी
FCRA में पंजीकरण या फिर केंद्र सरकार से पहले से मंजूरी की जरूरत होती है। किसी खास प्रोजेक्ट के लिए किसी खास डोनर से तय योगदान पाने के लिए आम तौर पर पहले से मंजूरी दी जाती है, जो संगठन नियमित रूप से विदेशी फंडिंग पाना चाहते हैं वे जरूरी योग्यता शर्तों को पूरा करने पर FCRA पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। नए पंजीकरण के लिए संगठन को आमतौर पर अपना अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड दिखाना होता है।
यह लोग ले सकते हैं विदेश से चंदा
बता दें कि FCRA के तहत योग्य व्यक्ति, एसोसिएशन, एनजीओ, चैरिटेबल ट्रस्ट, शिक्षण संस्थान और धार्मिक संगठन विदेशी चंदा ले सकते हैं। हालांकि इनके लिए भी FCRA की शर्तों को पूरा करना होगा। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, गरीबी दूर करने, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक काम और सामाजिक या फिर आर्थिक विकास जैसी गतिविधियों में शामिल संगठन विदेशी फंडिंग के शामिल होना आवश्यक है। इसके अलावा सिर्फ एनजीओ या फिर चैरिटेबल संगठन होने से ही किसी संस्था को विदेश से पैसा लेने का अधिकार नहीं मिलेगा, बल्कि़ पहले FCRA मंजूरी लेनी पड़ेगी।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खास ब्रांच FCRA बैंक खाते में जमा होता है पैसा
विदेश से लिया गया चंदा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की नई दिल्ली मेन ब्रांच में मौजूद खास FCRA बैंक खाते के माध्यम से ही मिलना चाहिए। अलग बैंकिंग व्यवस्था अधिकारियों को विदेशी पैसे पर नजर रखने और यह देखने में मदद करती है, कि उसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है। ऐसे फंड पाने वाले संगठनों को रिकॉर्ड रखना होता है। साथ ही जरूरी रिपोर्टिंग और ऑडिटिंग नियमों का पालन करना होता है। कानून में मुख्य पदाधिकारियों, डायरेक्टर और ट्रस्टियों की पहचान की पुष्टि करने की जरूरतें भी शामिल हैं, जिसमें लागू होने पर आधार से जुड़े नियम भी शामिल हैं।