डिजीटल डेस्क , कानपुर:
उत्तर प्रदेश कानपुर 250 करोड़ रुपये से अधिक साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा साइबर ठगों से आगे बढ़ाते हुए बैंकिंग नेटवर्क तक पहुंचा दिया है। बर्रा पुलिस ने एक स्मॉल फाइनेंस बैंक के रिलेशन मैनेजर मुकेश झा को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मुकेश साइबर ठगों के लिए फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक खाते खुलवाने और उनमें बड़े पैमाने पर रकम का लेनदेन कराने में मदद करता था, पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर ठगों के नेटवर्क को मजबूत बनाने में बैंकिंग सिस्टम के भीतर मौजूद कुछ लोगों की भूमिका भी थी। आरोप है कि बोगस फर्मों के नाम पर खोले गए खातों को करोड़ों रुपये के लेनदेन के लिए तैयार किया जाता था। इन खातों में साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के जरिए वसूली गई रकम पहुंचाई जाती थी।
पहले फर्जी फर्म, फिर बैंक खाते और उसके बाद करोड़ों का लेनदेन
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग पहले आम लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और दूसरे दस्तावेज हासिल करते थे। इन दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फर्म तैयार की जाती थीं। इसके बाद इन्हीं फर्मों के नाम से बैंक खाते खुलवाए जाते थे।जांच में गुमटी नंबर-5 स्थित स्मॉल फाइनेंस बैंक में विमलेश जनरल स्टोर, अर्जुन नमकीन भंडार और राज कॉन्ट्रैक्टर्स जैसी फर्मों के नाम से खोले गए खातों का जिक्र सामने आया है। पुलिस का आरोप है कि इन खातों को खुलवाने में रिलेशन मैनेजर मुकेश झा की अहम भूमिका थी।
करोड़ों के लिए खातों की बढ़ाई लिमिट
साइबर ठगी से हासिल रकम को इन खातों में आसानी से ट्रांसफर किया जा सके, इसके लिए उनकी लेनदेन सीमा भी करोड़ों रुपये तक बढ़ाई गई थी। पुलिस के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और अन्य साइबर अपराधों से हासिल रकम इन खातों में जमा कराई जाती थी। खास बात यह है कि खातों में करोड़ों रुपये का लेनदेन होने के बावजूद गतिविधियां लंबे समय तक चलती रहीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन खातों को खोलने और उनकी लिमिट बढ़ाने की प्रक्रिया में किन-किन बैंक कर्मचारियों की भूमिका थी।पुलिस जांच में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क से जुड़े बैंककर्मी फर्जी खातों की निगरानी करते थे। अगर किसी खाते को लेकर साइबर शिकायत आती थी तो खाते में जमा रकम को जल्द से जल्द दूसरे माध्यमों से निकालने की कोशिश की जाती थी। इस व्यवस्था के चलते ठगी की रकम को बैंक स्तर पर होल्ड या फ्रीज होने से बचाने में मदद मिलने का आरोप है। पुलिस अब ऐसे सभी खातों और उनमें हुए ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड खंगाल रही है।
5 से 10 फीसदी कमीशन का आरोप
पुलिस के अनुसार, बैंककर्मियों को इस पूरे खेल के बदले कमीशन दिया जाता था। मुकेश झा पर भी साइबर ठगों के खातों में होने वाले लेनदेन के बदले 5 से 10 प्रतिशत तक कमीशन लेने का आरोप है। जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने मुकेश झा को गिरफ्तार किया और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
10 आरोपी गिरफ्तार
बर्रा पुलिस अब तक इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें साइबर ठगी से जुड़े लोगों के अलावा बैंककर्मी भी शामिल हैं। पुलिस पूछताछ और आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के आधार पर नेटवर्क की अन्य कड़ियों की तलाश कर रही है।
ठगों के डिजिटल सुराग भी मिले
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क का कथित सरगना अभय शुक्ला उर्फ सुल्तान मिर्जा है। पुलिस का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी शुरू होने के बाद वह पहले नेपाल और फिर दुबई चला गया। जांच के दौरान पुलिस को उसके संबंध में कई डिजिटल सुराग भी मिले हैं। अब पुलिस का फोकस उन लोगों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने साइबर ठगों को फर्जी फर्म, बैंक खाते और करोड़ों रुपये के लेनदेन का रास्ता उपलब्ध कराया।250 करोड़ की ठगी के इस मामले में बैंककर्मी की गिरफ्तारी के बाद जांच का फोकस अब सिर्फ ठगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे नेटवर्क पर है जिसने साइबर अपराध की रकम को बैंकिंग सिस्टम के जरिए इधर-उधर करने में मदद की।

