- रबूपुरा में प्रस्तावित सेंटर कानूनी पेच में अटका, गंभीर घायलों को करना पड़ रहा रेफर
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : गौतमबुद्ध नगर की पहचान देश ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार मजबूत हो रही है। जेवर में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे समेत तेजी से बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों के बीच जिले में यातायात का दबाव भी बढ़ रहा है। इसके बावजूद गंभीर सड़क हादसों और दुर्घटनाओं के मरीजों के लिए जिले में अब तक अलग और पूर्ण विकसित ट्रामा सेंटर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। रबूपुरा में प्रस्तावित ट्रामा सेंटर जमीन से जुड़े विवाद के कारण कानूनी पेच में फंसा हुआ है। मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन होने से परियोजना की आगे की कार्रवाई प्रभावित है।
इसका असर हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है। राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) की इमरजेंसी में हर साल हजारों ट्रामा मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें गंभीर स्थिति वाले मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए दिल्ली या अन्य हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। वर्ष 2026 में जनवरी से अगस्त तक जिम्स में 4,712 ट्रामा मरीज पहुंचे, जिनमें 3,294 सड़क हादसे में घायल थे। इनमें 955 मरीजों को रेफर किया गया।
हर साल बढ़ रहा ट्रामा मरीजों का दबाव
जिम्स के आंकड़े बताते हैं कि ट्रामा मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2023 में 4,268 ट्रामा मरीज पहुंचे थे, जिनमें 2,688 सड़क हादसे में घायल थे। वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 5,133 पहुंच गई। इनमें 3,455 सड़क हादसे के मरीज थे और 1,072 को रेफर किया गया। वर्ष 2025 में 6,495 ट्रामा मरीज पहुंचे, जिनमें 4,543 सड़क हादसे में घायल थे। इस वर्ष जनवरी से अगस्त तक ही 4,712 ट्रामा मरीज अस्पताल पहुंच चुके हैं।
शुरुआती घंटे होते हैं बेहद महत्वपूर्ण
यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे, एनएच-34, एनएच-नौ समेत प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने के साथ हादसों का खतरा भी बना रहता है। गंभीर रूप से घायल मरीजों के लिए हादसे के बाद शुरुआती घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में यदि मरीज को तत्काल विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध न हो और दूसरे शहर या हायर सेंटर रेफर करना पड़े तो उपचार शुरू होने में देरी का जोखिम रहता है।
जिम्स में 24 घंटे इमरजेंसी, इमरजेंसी मेडिसिन एवं ट्रामा केयर की सुविधा उपलब्ध है। यहां ट्राइएज, रिससिटेशन एरिया, माइनर आपरेशन थिएटर और करीब 30 बेड की व्यवस्था है। हालांकि, जिले में अलग से पूर्ण विकसित ट्रामा सेंटर की कमी अभी भी बनी हुई है।
कानूनी विवाद के कारण अटकी परियोजना
स्वास्थ्य विभाग की ओर से रबूपुरा में ट्रामा सेंटर प्रस्तावित किया गया था। जमीन से जुड़े मामले में एक पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके चलते परियोजना की आगे की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। अधिकारियों के अनुसार जिले में ट्रामा सेंटर की आवश्यकता बनी हुई है।
