ट्रंप होर्मुज के लिए क्या देंगे अग्नि परीक्षा या हट जाएंगे पीछे? आइए जानते हैं क्या होगा…

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डिजिटल डेस्क ः

अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन रहा होर्मुज पर अब ट्रंप ने सबसे बड़ी स्ट्राइक को टाल दिया है। जानकारी के अनुसार ईरान होर्मुज को खोलने के लिए तैयार है, वहीं स्थिति जस की तस बनी हुई है। ईरान से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिकी नाकाबंदी और आर्थिक प्रतिबंध हटने तक होर्मुज नहीं खुलेगा। ईरानी नेता मुज्तबा समझ गए हैं कि ट्रंप के लिए होर्मुज नाख का सवाल बन चुका है, ऐसे में ईरानी सुप्रीम लीडर दुनिया के सबसे बड़े तेल चोक प्वाइंट को खोलने के बदले अपनी हर शर्त पर ट्रंप के हस्ताक्षर चाहते हैं और इसमें शीर्ष पर शुल्क वसूलने की मांग है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रंप ईरान की सभी शर्त को स्वीकार करेंगे या फिर ईरान के खिलाफ महाविनाश का एक नया अध्याय शुरु करेंगे।

बता दें कि अरब की शांति की सूईं फिर एक बार होर्मुज स्ट्रेट पर आकर अटक चुकी है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एलान किया है या तो 48 घंटे में होर्मुज खुलेगा या फिर ईरान को इसकी बारूदी कीमत चुकानी पड़ेगी। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने उन्हें फोन किया और कहा प्लीज, आइए बात करते हैं। वो बात करना चाहते हैं। जानकारी के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बृहस्पतिवार सुबह तक की मोहलत दी है। धमकी दी है यदि होर्मुज नहीं खुला तो संग्राम होगा। ट्रंप की इस धमकी के पीछे उनकी गनबोट डिप्लोमैसी को माना जा रहा है। इसके जरिए वो होर्मुज में ईरान और ओमान की बीच समझौता चाहते हैं। होर्मुज पर एक समझौता आकार ले रहा है। माना जा रहा है कि इसपर बात बन सकती है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि ये समझौता महज ओमान और ईरान के बीच होगा। इसका अमेरिका से कोई ताल्लुक नहीं है।

ईरान इसलिए चाहता है अधिकार ः

जानकारी के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में सबसे संकरा रास्ता ईरान के लराक द्वीप और ओमान के जाजीरत सलामा द्वीप के बीच मौजूद है। यहां लगभग 19.5 किमी का हिस्सा ईरान के जलक्षेत्र में आता है, वहीं 19.5 किमी का हिस्सा ओमान के जलक्षेत्र में है। ऐसा इसलिए क्योंकि होर्मुज के सबसे संकरे हिस्से की कुल चौड़ाई सिर्फ 39 किमी के आसपास है। द्वीप के ठीक पास भारी जहाज नहीं चलते, इसलिए इनबाउंड लेन और द्वीप के बीच 5-6 किमी का सुरक्षित फासला रखा जाता है।

विवाद न खत्म होने का यह है मुख्य कारण ः

सूत्रों के आधार पर, अमेरिका की शर्त है कि स्थायी सीजफायर लागू हो. जबकि ईरान की शर्त है अमेरिकी नाकाबंदी तुरंत हटाई जाए। अमेरिकी ये भी चाहता है कि परमाणु वार्ता शुरू हो, जबकि ईरान पहले तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध खत्म करने की जिद पर अड़ा हुआ है। अमेरिका और ईरान दो मु्द्दे पर राजी होते हुए भी नजर आ रहे हैं, यानी कि होर्मुज खुला तो ईरानी जलक्षेत्र से जहाज होर्मुज में एंट्री करेंगे। वहीं बाहर निकलने के लिए ओमान के जलक्षेत्र का इस्तेमाल करेंगे, वहीं दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा पेच होर्मुज में शुल्क वसूलने को लेकर है। दावा है कि अमेरिका होर्मुज में कोई शुल्क नहीं चाहता, जबकि ईरान शुल्क वसूलने पर अड़ा है। इसी के चलते विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।