– गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में जम्मू और कश्मीर का नेतृत्व कर रहीं है मरिहम और छत्तीसगढ़ का रागिनी
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : जिन इलाकों की पहचान अक्सर आतंकवाद, नक्सलवाद और संघर्ष की खबरों से होती है, वहां की बेटियां अब अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं। जम्मू-कश्मीर के बारामूला की मरिहम तारया और छत्तीसगढ़ की रागिनी साहू उन बेटियों में शामिल हैं, जो अपने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों के लिए उम्मीद और प्रेरणा की नई तस्वीर पेश कर रही हैं। बारामूला में लंबे समय से सुरक्षा चुनौतियों और हिंसा का असर देखने को मिलता रहा है। वहीं छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में नक्सली हिंसा ने आम लोगों के जीवन और विकास को प्रभावित किया है। ऐसे माहौल के बीच इन क्षेत्रों की बेटियों का अंतरिक्ष विज्ञान की ओर बढ़ना बदलाव की एक प्रेरक कहानी सामने लाता है।
अंतरिक्ष तक सीमित नहीं बारामूला की मरिहम का सपनाबारामूला की रहने वाली मरिहम तारया मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में हिस्सा लेकर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं। ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वह दो सेटेलाइट तैयार करने के लिए चल रहे तकनीकी प्रशिक्षण सत्र में हिस्सा ले रही हैं। तकनीकी प्रशिक्षण के साथ शाम के समय प्रैक्टिकल गतिविधियों के जरिए वह अपने ज्ञान और कौशल को मजबूत कर रही हैं। मरिहम का सपना केवल अंतरिक्ष तक पहुंचने तक सीमित नहीं है। वह अंतरिक्ष विज्ञान के माध्यम से मानवता, शांति और अमन-चैन को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना चाहती हैं। मरिहम ने बताया कि वह यहां तक आने का श्रेय अपने चाचा रियाज अहमदरी और प्रिंसिपल तनवीर अहमद आगा को देती हैं। इन लोगों ने लगातार देश के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया और सदैव साथ दिया। जबकि उनके पिता वाटर सप्लाई का काम करते हैं और माता गृहणी हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आपदा समाधान का सपना
छत्तीसगढ़ की रागिनी साहू भी मिशन शक्तिसैट के जरिए अपने सपनों को नई दिशा दे रही हैं। रागिनी ऐसे क्षेत्र से आती हैं, जहां नक्सली हिंसा की चुनौतियों के बीच विकास की राह आसान नहीं रही है। इसके बावजूद उन्होंने विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक को अपने भविष्य का माध्यम चुना है। रागिनी का लक्ष्य आपदाओं की पहले से पहचान करने वाली तकनीक विकसित करना है। उनका मानना है कि यदि प्राकृतिक आपदाओं के बारे में समय रहते जानकारी मिल जाए तो लोगों को सुरक्षित करने और नुकसान को कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं। वह बताती हैं कि उनके पिता किसान हैं और उनके सामने अचानक आई आपदाओं के बाद कई समस्याएं खड़ी हो जाती हैं, पहले उनका सपना था, कि साइंस के क्षेत्र में जाकर किसानों के हित में काम करना था, लेकिन वह अब पूरे देश की समस्याओं के समाधान के लिए काम करना चाहती हैं। वह बताती हैं कि उनके गांव सुबाती कालदा में बेहतर पढ़ाई नहीं मिलने के कारण नानी के गांव महासमुंद में रहकर पढ़ाई कर रही हैं।
सैटेलाइट निर्माण की बारीकियां सीख रहीं बेटियां
मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम के तहत दोनों छात्राएं अन्य प्रतिभागियों के साथ जीबीयू में तैयार किए जा रहे दो सेटेलाइट के तकनीकी सत्र में प्रशिक्षण ले रही हैं। दिन में तकनीकी जानकारी हासिल करने के बाद शाम को प्रैक्टिकल के जरिए सीखी गई चीजों को समझने और लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों बेटियां सेवानिवृत्ति विंग कमांडर और न्यूरिजन स्पेस की सीईओ जया तारे के नेतृत्व में काम कर रही हैं।

