देशगौतम बुद्ध नगर

हड़ताल के फेर में सफाई व्यवस्था फेल, कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहे सेक्टर

हड़ताल के फेर में सफाई व्यवस्था फेल, कूड़े के ढेर में तब्दील हो रहे सेक्टर
  • दो दिन से सफाईकर्मी काम से दूर, वेतन, रुके भुगतान और मृतक आश्रितों को नौकरी समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर: वेतन, लंबित भुगतान और मृतक आश्रितों को नौकरी देने समेत विभिन्न मांगों को लेकर सफाईकर्मियों की हड़ताल का असर अब शहर की सफाई व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। पिछले दो दिनों से बड़ी संख्या में सफाईकर्मियों के काम पर नहीं आने के कारण कई सेक्टरों में कूड़ा उठान प्रभावित हो गया है। जगह-जगह कूड़ा प्वाइंट और सड़क किनारे गंदगी जमा होने लगी है। यदि हड़ताल आगे भी जारी रही तो स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

सफाईकर्मियों का कहना है कि वेतन से जुड़े मामलों के साथ कई अन्य मांगें लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों की ओर से इन समस्याओं के समाधान की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों के काम पर नहीं आने से घरों और बाजारों से निकलने वाला कूड़ा नियमित रूप से नहीं उठ पा रहा है।

सेक्टरों में बढ़ने लगी परेशानी

हड़ताल का सबसे ज्यादा असर उन स्थानों पर दिखाई दे रहा है जहां नियमित रूप से कूड़ा उठान नहीं हो सका। कूड़ा प्वाइंट पर कचरा बढ़ने के साथ सड़क किनारे भी गंदगी दिखाई देने लगी है। इससे आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सेक्टर-11 के निवासी नितिन ने बताया कि दो दिनों से घरों से कूड़ा उठाने की व्यवस्था प्रभावित है। घरों में कूड़ा जमा हो रहा है और आसपास के कूड़ा प्वाइंट पर भी गंदगी बढ़ रही है। लोगों को आशंका है कि यदि हड़ताल लंबी चली तो दुर्गंध के साथ आवारा पशुओं की समस्या भी बढ़ सकती है।

पहले भी हड़ताल से बिगड़ी थी व्यवस्था

शहर में सफाईकर्मियों की हड़ताल के कारण सफाई व्यवस्था प्रभावित होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले मार्च में बर्खास्त सफाईकर्मियों की हड़ताल करीब चार दिन चली थी। उस दौरान भी कई इलाकों में कूड़ा उठान प्रभावित हुआ था।

जून में करीब 1,500 सफाईकर्मी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे थे। उस समय भी कई सेक्टरों में कूड़ा जमा होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा था। अब सितंबर में एक बार फिर सफाईकर्मियों के काम से दूर रहने के कारण शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है।

स्थायी समाधान की मांग

बार-बार होने वाली हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था की स्थायी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सेक्टरवासियों का कहना है कि कर्मचारियों की वेतन, भुगतान और अन्य मांगें महत्वपूर्ण हैं और उनका समाधान होना चाहिए, लेकिन इसका असर सीधे आम लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए।

लोगों का कहना है कि प्राधिकरण और संबंधित पक्षों को कर्मचारियों की मांगों का स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि भविष्य में वेतन अथवा अन्य समस्याओं को लेकर बार-बार सफाई व्यवस्था ठप न हो। साथ ही हड़ताल की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, जिससे शहर में कूड़ा जमा न हो और लोगों को गंदगी के बीच रहने के लिए मजबूर न होना पड़े।

फिलहाल सफाईकर्मियों की हड़ताल के चलते शहर के कई हिस्सों में सफाई व्यवस्था प्रभावित है। हड़ताल कब तक चलेगी और कर्मचारियों की मांगों पर क्या समाधान निकलता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।