- 18 अगस्त को मुनिरका स्थित कमरे में गंभीर हालत में मिले थे मनीष आनंद
- किशनगढ़ थाना पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू की, सीसीटीवी फुटेज खंगाले
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली: IIT दिल्ली के PHD छात्र मनीष आनंद की करीब 45 दिन तक उपचार के बाद तीन अक्टूबर को एम्स में मौत हो गई। वह 18 अगस्त को मुनिरका गांव स्थित किराये के कमरे में गंभीर हालत में मिले थे। इस घटना के बाद से उनका उपचार चल रहा था। मामले में किशनगढ़ थाना पुलिस ने आइआइटी दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत पर एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दक्षिणी पश्चिमी जिला पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के मुताबिक, बिहार के पूर्णिया जिले के रहने वाले मनीष आनंद ने वर्ष 2024 में आइआइटी दिल्ली के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग एंड बायोटेक्नोलाजी विभाग में पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया था। वह मुनिरका गांव में किराये के मकान में रहते थे।
18 अगस्त को पूरे दिन कमरे से बाहर नहीं आने पर पड़ोसियों को चिंता हुई। काफी देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और छात्र को अस्पताल पहुंचाया गया। करीब डेढ़ महीने तक उपचार चलने के बाद उनकी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, घटना आइआइटी दिल्ली परिसर में नहीं हुई थी। जांच के दौरान छात्र के कमरे के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए हैं। अब तक किसी अन्य व्यक्ति के संदिग्ध रूप से कमरे में आने-जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। स्वजन या किसी गवाह ने भी किसी व्यक्ति पर संदेह नहीं जताया है। पुलिस छात्र की मौत की परिस्थितियों और घटना के कारणों की जांच कर रही है।
डेढ़ माह में दूसरी मौत से बढ़ी चिंता
आइआइटी दिल्ली में करीब डेढ़ महीने के भीतर यह दूसरी छात्र की मौत है। इससे पहले 22 अगस्त को एमएससी फिजिक्स के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत हुई थी। दोनों घटनाओं ने संस्थान में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव और समय पर भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराने को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
छात्रों से सहायता लेने की अपील
मनीष आनंद के निधन पर आइआइटी दिल्ली प्रशासन ने छात्रों से एक-दूसरे का सहयोग करने और कठिन परिस्थितियों में संस्थान की काउंसलिंग सेवाओं की मदद लेने की अपील की है। परिसर में छात्र की स्मृति में शोक सभा भी आयोजित की गई।
