देशगौतम बुद्ध नगर

पिता का साया नहीं मिला, नानी ने पाला और अब अंतरिक्ष में उड़ान भरने को तैयार सुजाता

पिता का साया नहीं मिला, नानी ने पाला और अब अंतरिक्ष में उड़ान भरने को तैयार सुजाता
  • जीबीयू में आयोजित मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में प्रतिभाग कर सेटेलाइट बनाने के सीख रहीं हैं गुर

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर: कभी पिता का चेहरा नहीं देखा, मां का भी भरपूर प्यार नहीं मिल सका। नानी के हाथों पली-बढ़ी सुजाता ने जिंदगी की चुनौतियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया। सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर पत्रकार बनने का सपना देखने वाली यह बेटी आज अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट तकनीक को समझ रही है और सैटेलाइट तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित नौ दिवसीय मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम में अंडमान का नेतृत्व कर रही सुजाता आज अंडमान की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। उनकी कहानी संघर्ष, हौसले और सपनों को पंख देने की मिसाल है।सुजाता बताती हैं कि उनके जन्म से पहले ही उनके पिता का निधन हो गया था। परिवार में वह इकलौती संतान थीं, इसलिए उन्हें भाई-बहन का प्यार भी नहीं मिल पाया। उनकी मां नौकरी करती थीं, जिसके कारण उन्हें मां का पर्याप्त समय और स्नेह नहीं मिल सका। ऐसे में नानी ने ही उनका पालन-पोषण किया और जीवन की हर मुश्किल में उनका साथ दिया। सुजाता का कहना है कि आज वह जिस मुकाम पर पहुंची हैं, उसमें उनकी नानी का सबसे बड़ा योगदान है। सरकारी स्कूल से पढ़ाई के दौरान उन्होंने पत्रकार बनने का सपना देखा था, लेकिन समय के साथ अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई। मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम ने उन्हें सैटेलाइट तकनीक को करीब से समझने और उसके निर्माण की प्रक्रिया सीखने का अवसर दिया। अब सुजाता का सपना सिर्फ अंतरिक्ष तक पहुंचना नहीं, बल्कि अपनी उपलब्धियों के जरिए समाज में मानवता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। उनका मानना है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि हौसला और मेहनत कायम रहे तो सपनों को उड़ान जरूर मिलती है।

सुजाता अब स्पेस के माध्यम से एस्ट्रोफिजिसिस्ट (खगोल भौतिकीविद्) बनना चाहती हैं और यही से अपने करियर को आगे बढ़ाना चाह रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले जब पत्रकार बनने की चाह रखती थी, तब स्पेस की स्टोरी कवर करना चाहतीं थीं, लेकिन अब जब वह खुद उसी क्षेत्र में करियर बना रहीं हैं। समाज के लिए कुछ अच्छा और बेहतर करना चाहती हैं। इसीलिए एस्ट्रो फिजिक्स के क्षेत्र में काम करके मदरबोर्ड में बदलाव करने के साथ ही साफ्टवेयर में कई नई तकनीकी लाना चाहती हैं। वह अपना मार्गदर्शक डा. एपीजे अब्दुल कलाम को मानती हैं और उन्हीं के तरह देश के लिए कुछ बड़ा करने की कोशिश में जुटी हुई हैं।