- कम उम्र में शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारी का निर्वाहन करने के साथ अंतरिक्ष के लिए किया काम
- भारत से आजादीसैट के तहत नारी शक्ति को जोड़ने की शुरू की थी पहल अब दुनियाभर की बेटियां जुटीं
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में 27 सेटेलाइट के प्रक्षेपण से जुड़ीं स्पेस किड्ज़ इंडिया की संस्थापक डा. श्रीमथी केसन् अब दुनिया भर की बेटियों को अंतरिक्ष और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की मुहिम में जुटी हैं। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम के जरिए वह बेटियों को अंतरिक्ष की दुनिया से जोड़ने और उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित करने का प्रयास कर रही हैं। मिशन शक्तिसैट को दुनिया का पहला ऐसा कार्यक्रम बताया जा रहा है, जिसमें 108 देशों की 1200 बेटियों को शामिल किया है। श्रीहरिकोटा से अब तक लांच की गई सेटेलाइट में 11 प्रतिशत योगदान महिलाओं का रहा है।
कम उम्र में शादी होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी के साथ डा. श्रीमथी केसन् ने अंतरिक्ष में उड़ान भरने की कोशिश की और उसमें वह सफल रहीं, जिसके चलते अब तक 27 सेटेलाइट के सफल प्रक्षेपण किए जा चुके हैं। इसमें से एक नासा से और पांच श्रीहरिकोटा से सफल प्रक्षेपण भी शामिल हैं। इनके नेतृत्व में दुनिया की सबसे हल्की सेटेलाइट तैयार किए जाने का कीर्तिमान हासिल कर चुकी हैं। अब वह अपने ही तरीके से दुनियाभर की बेटियों को एक मंच देकर अंतरिक्ष में उड़ान भरने के लिए तैयार कर रही हैं। दुनिया का पहला आयोजित हो रहा मिशन शक्तिसैट कार्यक्रम का आयोजन भारत के जीबीयू में 108 देशों की 1200 बेटियों को अंतरिक्ष में उड़ान के तैयारी करवा रही हैं। इन बेटियों को इसरो के अलावा कई देशों के विशेषज्ञ विज्ञानी प्रशिक्षण देने के साथ ही व्यावहारिक ज्ञान भी दे रहे हैं। कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को प्राथमिकता दी गई है। इसके जरिए ग्रामीण और अपेक्षाकृत कम संसाधनों वाले क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने और अंतरिक्ष तकनीक को करीब से समझने का अवसर मिल रहा है।
बेटियों की अंतरिक्ष में भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य :

डा. श्रीमथी केसन् का लक्ष्य अंतरिक्ष और टेक्नोलाजी के क्षेत्र में बेटियों की भागीदारी को बढ़ाना है। उनका मानना है कि प्रतिभा किसी एक वर्ग या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। उचित अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राएं भी अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। भारत के मंगलयान मिशन में महिला वैज्ञानिकों की भूमिका ने बेटियों को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। अब उनका उद्देश्य दुनियाभर की बेटियों को तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मंच उपलब्ध कराना है।—
आजादीसैट से शुरू हुई पहल :
डा. श्रीमथी केसन् ने बेटियों को अंतरिक्ष में उड़ाने भरने की पहल भारत की 75वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के अवसर पर आजादीसैट कार्यक्रम के माध्यम से शुरू की थी। इस कार्यक्रम में देशभर की 75 छात्राओं को शामिल किया गया था। छात्राओं ने मिलकर एक सेटेलाइट तैयार किया था, जिसे श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। आजादीसैट की सफलता के बाद अब मिशन शक्तिसैट के जरिए इस पहल को वैश्विक स्तर पर विस्तार दिया गया है। 108 देशों की 1200 बेटियों को एक मंच पर लाकर उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक से जोड़ना इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह पहल केवल सेटेलाइट तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनियाभर की बेटियों को विज्ञान, तकनीक और अंतरिक्ष के क्षेत्र में बराबरी का अवसर देने की कोशिश है। मिशन शक्तिसैट के जरिए वह नई पीढ़ी की छात्राओं को यह संदेश दे रही हैं कि आसमान की कोई सीमा नहीं होती और सही अवसर मिलने पर बेटियां अंतरिक्ष तक अपनी उड़ान भर सकती हैं।

