- नारनौल की सेवानिवृत्त प्रोफेसर के बाद अटेली के राजकीय महिला महाविद्यालय के शिक्षक बने शिकार, स्क्रीन शेयर कराकर हासिल की बैंक संबंधी जानकारी
डिजिटल डेस्क, नारनौल : साइबर ठगी के प्रति लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद पढ़े-लिखे और तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी साइबर ठगों के जाल में फंस रहे हैं। नारनौल में सेवानिवृत्त महिला प्रोफेसर के साथ हुई साइबर ठगी के बाद अब अटेली के राजकीय महिला महाविद्यालय के लेक्चरर को ठगों ने अपना शिकार बनाया है। साइबर ठगों ने एपीके फाइल और स्क्रीन शेयरिंग के जरिये शिक्षक के बैंक खाते से 3 लाख 76 हजार 280 रुपये निकाल लिए। पीड़ित शिक्षक वर्तमान में रेवाड़ी में रहते हैं और अटेली मंडी स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में लेक्चरर हैं।
किताब की स्पेसिमेन कापी के लिए गूगल पर नंबर किया था सर्च
पीड़ित लेक्चरर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 18 सितंबर को उन्हें कालेज के लिए एक किताब की स्पेसिमेन कापी मंगवानी थी। इसके लिए उन्होंने गूगल पर पंकज बुक डिपो का मोबाइल नंबर तलाशा। इंटरनेट पर मिले नंबर पर उन्होंने संपर्क किया। फोन पर बातचीत के बाद सामने वाले व्यक्ति ने खुद को बुक डिपो का कर्मचारी बताया और वाट्सऐप के माध्यम से एक एपीके एप्लीकेशन भेज दी।
शिक्षक के अनुसार एपीके एप्लीकेशन में फार्म भरने में परेशानी आ रही थी। इसी दौरान उनके वाट्सऐप नंबर पर दूसरे मोबाइल नंबर से वीडियो काल की गई। काल करने वाले व्यक्ति ने उन्हें फार्म भरने में मदद करने की बात कही और मोबाइल की स्क्रीन शेयर करने को कहा। शिक्षक ने उसकी बात पर भरोसा करते हुए स्क्रीन शेयर कर दी।
फार्म भरवाने के दौरान हासिल की बैंक संबंधी जानकारी
स्क्रीन शेयर होने के बाद ठग ने शिक्षक को फार्म भरने की प्रक्रिया बताई। इसी दौरान उनसे निजी जानकारी के साथ बैंक खाते से संबंधित जानकारी भी भरवाई गई। इसके बाद रजिस्ट्रेशन पूरा करने के नाम पर शिक्षक से महज दो रुपये की पेमेंट करने को कहा गया।
शिक्षक ने अपने मोबाइल में मौजूद एसबीआइ के वाईओएनओ एप्लीकेशन से दो रुपये की पेमेंट कर दी। इसके बाद वह कालेज में अपनी कक्षा लेने चले गए। उस समय उन्हें अंदाजा नहीं था कि साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते तक पहुंच बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया को जाल की तरह इस्तेमाल किया है।
कक्षा के बाद मोबाइल देखा तो खाते से निकल चुके थे 3.76 लाख
करीब दो घंटे बाद शिक्षक ने अपना मोबाइल चेक किया तो उनके होश उड़ गए। बैंक खाते से 3,76,280 रुपये निकाले जा चुके थे। खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने के बाद उन्होंने तत्काल बैंक को सूचना दी। इसके साथ ही साइबर अपराध की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क किया। उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर भी शिकायत दर्ज कराई।
ई-जीरो एफआइआर के आधार पर केस दर्ज
साइबर क्राइम पंचकूला से मिली ई-जीरो एफआइआर और पीड़ित की शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाना नारनौल में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस साइबर ठगी में इस्तेमाल मोबाइल नंबर, वाट्सऐप संपर्क, एपीके फाइल और बैंक खाते से संबंधित लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
बार-बार सामने आ रहा एपीके फाइल से ठगी का तरीका
साइबर ठगों की ओर से एपीके फाइल के जरिये ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग किसी संस्था, बैंक, कंपनी, बुक डिपो या अन्य सेवा प्रदाता का कर्मचारी बनकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद वाट्सऐप या अन्य माध्यम से संदिग्ध एप्लीकेशन भेजकर उसे डाउनलोड अथवा इंस्टाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। कई मामलों में स्क्रीन शेयरिंग या वीडियो काल के जरिये पीड़ित को विश्वास में लेकर निजी अथवा बैंक संबंधी जानकारी हासिल की जाती है।
पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि इंटरनेट पर मिले किसी अनजान मोबाइल नंबर पर संपर्क करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करें। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टाल न करें और बैंकिंग एप्लीकेशन से जुड़ी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी होने पर रकम को बचाने के लिए बिना देरी किए 1930 पर शिकायत करना महत्वपूर्ण है।
