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यूपी में 85,854 नाम बिना कारण काटने की खबर भ्रामक और निराधार: मुख्य निर्वाचन अधिकारी

यूपी में 85,854 नाम बिना कारण काटने की खबर भ्रामक और निराधार: मुख्य निर्वाचन अधिकारी
  • एसआईआर के तहत नाम हटाने के लिए जनरेट किए गए थे 85,854 फॉर्म-7
  • तरबगंज और पीलीभीत में कई नाम हटवाने के लिए दिए गए सभी संबंधित फॉर्म निरस्त
  • जांच में 198 ऐसे मामले मिले, जिनमें एक व्यक्ति ने 10 से अधिक फॉर्म भरे

डिजिटल डेस्क, लखनऊ : उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से 85,854 नाम बिना कारण काटे जाने की खबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने भ्रामक और निराधार बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर)-2026 के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी की गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, छह जनवरी 2026 को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ मतदाता शामिल थे। नो मैपिंग और तार्किक विसंगतियों के कारण करीब 3.26 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए थे। सुनवाई के बाद अयोग्य पाए गए मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया के तहत 85,854 फॉर्म-7 जनरेट किए गए। इन फॉर्म के माध्यम से नाम हटाने का कारण और तारीख दर्ज करने की व्यवस्था की गई, ताकि पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड उपलब्ध रहे।

उन्होंने बताया कि तरबगंज और पीलीभीत में एक व्यक्ति की ओर से कई मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए दिए गए सभी संबंधित फॉर्म-7 निरस्त कर दिए गए। वहीं, लाखों फॉर्म-7 की जांच के दौरान 198 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें एक व्यक्ति ने 10 से अधिक फॉर्म भरे थे। इन मामलों में कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास किया गया।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि एसआइआर-2026 की प्रक्रिया लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 और 27 अक्टूबर 2025 को जारी निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत संपन्न हुई। आयोग के दिशा-निर्देश उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

उन्होंने खबर के प्रकाशन से पहले पक्ष रखने का अवसर दिए जाने के संबंध में भी जानकारी दी। उनके मुताबिक, आठ अक्टूबर को सवाल भेजकर उसी दिन शाम सात बजे तक जवाब मांगा गया था, जबकि संबंधित ईमेल दोपहर 3:32 बजे प्राप्त हुआ था।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से पूरी की गई है।