दिल्ली : 22 कैदी से जेलों होंगे रिहा, 77 आरोपियों को नहीं मिली राहत

डिजिटल डेस्क : दिल्ली सरकार के गृह विभाग और तिहाड़ जेल प्रशासन ने सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) ने रोहिणी और मंडोली जेलों में सजा काट रहे कैदियों की समय पूर्व रिहाई को लेकर अहम फैसला लिया है। प्रदेश के गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई इस उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 473 और दिल्ली जेल नियमों के तहत कुल 100 कैदियों की याचिकाओं पर विचार-विमर्श किया था। उपराज्यपाल की अंतिम मंजूरी के साथ बोर्ड ने बड़ा संदेश देते हुए 22 कैदियों को सशर्त रिहा करने की सिफारिश की है, जबकि 77 खूंखार और जघन्य अपराधियों की रिहाई अर्जियों को सिरे से खारिज कर दिया गया है। एक अन्य कैदी के फैसले को फिलहाल टाल दिया गया है। बहुचर्चित आइटी एग्जीक्यूटिव जिगीषा घोष हत्याकांड के मुख्य दोषियों रवि कपूर और बलजीत मलिक उर्फ पोपी की रिहाई की मांग को पूरी तरह से नकार दिया गया। अपनी मासूम बेटी से छेड़छाड़ का विरोध करने वाली मां की बेदर्दी से हत्या करने वाले दोषी शख्स, विकासपुरी में 16 वर्षीय किशोर का अपहरण कर जान लेने वाले गौरव और लूट के इरादे से 78 साल की बुजुर्ग महिला की हत्या करने वाले इमरान उर्फ मुर्गी चोर को भी बोर्ड से कोई राहत नहीं मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि महज 14 या 20 साल की न्यूनतम जेल काट लेना समय पूर्व रिहाई का खुद कानूनी अधिकार नहीं बन जाता। अर्जियों को खारिज करने के पीछे कैदियों का आपराधिक इतिहास, जेल परिसर के अंदर से मोबाइल, सर्जिकल ब्लेड या धारदार हथियार मिलना, जेल कर्मचारियों के साथ मारपीट और फरलो या पैरोल के दौरान भाग जाने जैसी गंभीर अनुशासनहीनताएं मुख्य वजह रहीं। दिल्ली पुलिस और प्रोबेशन अधिकारियों द्वारा दी गई प्रतिकूल रिपोर्टों ने भी इन याचिकाओं को खारिज करने में अहम भूमिका निभाई।