मेडिकल कॉलेजों में मेडिसिन विभाग से क्यों दूरी बना रहे छात्र? जानिए क्या हैं बड़ी वजहें

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रवि शर्मा, उत्तर प्रदेश : मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक सवाल लगातार चर्चा में है कि आखिर कई मेडिकल छात्र और जूनियर डॉक्टर मेडिसिन विभाग में जाने से क्यों हिचकिचा रहे हैं। मेडिसिन को मेडिकल कॉलेजों की सबसे महत्वपूर्ण और प्रतिष्ठित शाखाओं में गिना जाता है। इसके बावजूद इस विभाग की कठिन कार्यप्रणाली, लगातार बढ़ता वर्कलोड और लंबे ड्यूटी घंटे छात्रों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों को अलग-अलग तरह की गंभीर और जटिल बीमारियों वाले मरीजों का इलाज करना पड़ता है। एक ही समय में बड़ी संख्या में मरीजों की जांच, उनकी रिपोर्ट की निगरानी, दवाओं में बदलाव और इमरजेंसी केस संभालने की जिम्मेदारी रहती है। यही वजह है कि इस विभाग में काम का दबाव दूसरे कई विभागों की तुलना में अधिक महसूस किया जाता है।

लंबी ड्यूटी और कम आराम बड़ी वजह

मेडिसिन विभाग से दूरी बनाने की सबसे बड़ी वजहों में लंबे समय तक ड्यूटी और पर्याप्त आराम नहीं मिलना शामिल है। जूनियर डॉक्टरों और रेजिडेंट्स को कई बार लगातार घंटों तक अस्पताल में रहना पड़ता है। नाइट ड्यूटी, इमरजेंसी और ऑन-कॉल जिम्मेदारियां उनकी दिनचर्या का हिस्सा होती हैं। लगातार काम के कारण पढ़ाई, व्यक्तिगत जीवन और नींद के लिए समय निकालना मुश्किल हो जाता है। मेडिकल छात्रों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि उन्हें क्लीनिकल काम के साथ-साथ अपनी पढ़ाई और भविष्य की परीक्षाओं की तैयारी भी करनी होती है।

गंभीर मरीजों की जिम्मेदारी भी बढ़ाती है दबाव

मेडिसिन विभाग में अक्सर ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिनकी हालत गंभीर होती है या जिन्हें कई बीमारियां एक साथ होती हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर को तेजी से निर्णय लेना पड़ता है। मरीज की स्थिति बिगड़ने पर तुरंत उपचार शुरू करना और उसकी लगातार निगरानी करना जरूरी होता है। इस तरह की जिम्मेदारी के कारण डॉक्टरों पर मानसिक दबाव भी बढ़ता है। कई युवा डॉक्टर ऐसी विशेषज्ञता चुनना पसंद करते हैं जहां काम के घंटे अपेक्षाकृत नियंत्रित हों और इमरजेंसी का दबाव कम हो।

सुपर – स्पेशलाइजेशन भी एक कारण

मेडिसिन चुनने के बाद आगे DM जैसी सुपर-स्पेशलिटी की दिशा में जाने का विकल्प मौजूद होता है। हालांकि, इसका मतलब यह भी है कि विशेषज्ञ बनने के लिए मेडिकल छात्रों को कई वर्षों तक अतिरिक्त प्रशिक्षण और कठिन प्रतिस्पर्धा से गुजरना पड़ सकता है। यही कारण है कि कुछ छात्र शुरुआत से ही ऐसी शाखाओं को प्राथमिकता देते हैं जहां उन्हें अपनी पसंद के अनुसार करियर और बेहतर “कार्य-जीवन संतुलन” (Work Life balance) विकल्प दिखाई देता है।

फिर भी मेडिसिन की अहमियत कम नहीं

मेडिसिन विभाग में काम का दबाव अधिक है, लेकिन चिकित्सा व्यवस्था में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। शरीर के अलग-अलग अंगों से जुड़ी जटिल बीमारियों को समझने और मरीज को सही दिशा में इलाज दिलाने में मेडिसिन विशेषज्ञों की अहम भूमिका होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मेडिकल कॉलेजों में पर्याप्त डॉक्टरों की नियुक्ति, बेहतर ड्यूटी शेड्यूल, पर्याप्त रेस्ट और बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो मेडिसिन विभाग में छात्रों की रुचि बढ़ाई जा सकती है।

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