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नौ दिन तक मौत को मात देकर सुरंग से बाहर निकले संजय, होठों पर हमेशा रहा कृष्ण का नाम

नौ दिन तक मौत को मात देकर सुरंग से बाहर निकले संजय, होठों पर हमेशा रहा कृष्ण का नाम

डिजिटल डेस्कः नेपाल में आई त्रासदी के दौरान सुरंग में फंसे संजय साह को नौ दिन बाद शुक्रवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। बाहर निकलने के बाद संजय साह ने बताया कि उन नौ दिनों में उनके पास न तो रोशनी थी और न ही बाहर निकलने का कोई रास्ता था, केवल उनके मुख से कृष्ण महामंत्र का जाप निकल रहा था साथ ही संजय साह ने कहा कि जिस दिन उन्हें बाहर निकाला गया वह दिन भी खास था, जिस भगवान का नाम ले रहे थे उन्हीं के जन्म दिन पर उनको सुरंग से बाहर निकाला गया। संजय ने बाहर आने के बाद सुरक्षा कर्मियों को बताया कि मैं पिछले नौ दिनों से हरे कृष्ण महामंत्र का जाप कर रहा था।

संजय ने हादसे के शुरुआती पल भी बताए। कहा कि वह नियंत्रण कक्ष में काम कर रहे थे। हादसा होते ही उन्होंने वहां मौजूद लोगों से भागने को कहा। संजय के मुताबिक उन्होंने लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरे लोग किसी तरह बाहर निकल गए, लेकिन तब तक संजय के लिए खुद बाहर निकलना मुश्किल हो चुका था। वह दूसरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी महसूस कर रहे थे। इसी वजह से वह बाकी लोगों के साथ समय रहते बाहर नहीं निकल पाए। हालात बदल गए और वह खुद सुरंग के भीतर फंस गए। अगले नौ दिन उनके लिए इंतजार और अनिश्चितता से भरे रहे।

सुरंग से बाहर आने के बाद संजय ने बचाव दल को एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सुरंग के आसपास तीन या चार लोगों से उनका संपर्क हुआ था। यह संपर्क बातचीत या आवाज के जरिए हुआ था। संजय ने कहा कि हम आसपास केवल तीन या चार लोगों से बात करके या आवाज के जरिए संपर्क कर पा रहे थे, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। संजय को आशंका है कि सुरंग के और अंदर भी लोग फंसे हो सकते हैं। सुरंग काफी लंबी है। उनका कहना है कि हादसे के दौरान बाढ़ के तेज पानी कुछ लोगों को सुरंग के काफी अंदर तक ले गया हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है कि सभी लोग समय रहते बाहर न निकल पाए हों। इसी वजह से सुरंग के भीतर आगे तक तलाश जारी है।

संजय साह की उम्र 30 साल है। वह नेपाल के मधेश प्रांत के सप्तरी जिले के रहने वाले हैं। वह नेपाल विद्युत प्राधिकरण में कर्मचारी हैं और परियोजना में फोरमैन के तौर पर काम कर रहे थे। हादसे के समय संजय नियंत्रण कक्ष में मौजूद थे। वहां उनकी जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की थी।