डिजिटल डेस्क , लखनऊ : उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने के अभियान के तहत एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की संयुक्त टीम ने राजधानी में नशीली दवाओं के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। ट्रांसपोर्ट नगर में हुई कार्रवाई के दौरान करीब 228 किलोग्राम नशीली दवाएं बरामद की गईं। इनमें 9.60 लाख एल्प्राजोलाम टैबलेट, 1.20 लाख ट्रामाडोल कैप्सूल और कोडीनयुक्त कफ सिरप की 720 बोतलें शामिल हैं।
कार्रवाई में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। टीम ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन और 11,140 रुपये नकद भी बरामद किए। जांच के दौरान नशीली दवाओं की सप्लाई, बिलिंग और वितरण से जुड़े नेटवर्क की कई कड़ियां सामने आई हैं।
एक खेप ने खोला नेटवर्क का राज
एएनटीएफ को ट्रांसपोर्ट नगर में नशीली दवाओं की बड़ी खेप पहुंचने की सूचना मिली थी। तीन सितंबर को टीम ने मकान संख्या एस-363/364 के आसपास निगरानी शुरू की। इसी दौरान तीन संदिग्ध लोग कार्टूनों को बोरियों में छिपाते दिखाई दिए। तलाशी लेने पर किशन वासवानी, समीर अहमद और शाद इरशाद के कब्जे से बड़ी मात्रा में नशीली दवाएं बरामद हुईं।
पूछताछ में किशन वासवानी और समीर अहमद ने दवाओं की आपूर्ति कन्हैया फार्मा के संचालक उमेश कुमार से होने की जानकारी दी। इसके बाद उमेश कुमार और सतेन्द्र सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
फर्म के दस्तावेजों से हो रही थी बिलिंग
जांच में सामने आया कि उमेश कुमार कथित तौर पर सतेन्द्र सिंह की फर्म के दस्तावेजों का इस्तेमाल नशीली दवाओं की बिलिंग के लिए करता था। इसके बदले सतेन्द्र को कमीशन दिए जाने की बात सामने आई है।
एफएसडीए की जांच के दौरान कन्हैया फार्मा में प्रॉक्सीमेक-एसपीएएस कैप्सूल के 1,116 डिब्बों समेत सात प्रकार की दवाएं मिलीं। फर्म संचालक दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े पूरे अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सका। इसके बाद कन्हैया फार्मा को सील कर दिया गया।
पूछताछ में सामने आया एक और नाम
जांच आगे बढ़ने पर शाद इरशाद से पूछताछ की गई, जिसमें विशाल चौरसिया का नाम सामने आया। टीम ने विशाल को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने शाद को नशीली दवाओं की आपूर्ति करने की बात स्वीकार की।
जांच एजेंसियों के अनुसार, कोडीन से जुड़े एक मामले में अमीनाबाद थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद विशाल का दवा लाइसेंस निरस्त हो चुका था। इसके बाद वह कथित तौर पर दूसरी फर्मों के माध्यम से नशीली दवाओं का कारोबार कर रहा था। बरामद कोडीनयुक्त कफ सिरप के संबंध में उसने इसे बृजेश वर्मा से खरीदने की बात बताई है।
पूरे नेटवर्क की जांच जारी
एएनटीएफ के मुताबिक, किशन वासवानी, समीर अहमद, शाद इरशाद, उमेश कुमार, सतेन्द्र सिंह और विशाल चौरसिया को अवैध नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है। सभी छह आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21/22/29 के तहत गिरफ्तार किया गया है।
बरामद दवाओं के नमूने नियमानुसार न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर जांच की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कार्रवाई की वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप के माध्यम से की गई है। एजेंसियां अब नेटवर्क से जुड़े अन्य सप्लायरों और कारोबारियों की भूमिका की भी जांच कर रही हैं।
यह कार्रवाई नशीली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में अहम मानी जा रही है, क्योंकि जांच एजेंसियों ने केवल दवाओं की बरामदगी तक कार्रवाई सीमित न रखते हुए सप्लाई, बिलिंग और वितरण नेटवर्क की कड़ियों को भी खंगालना शुरू कर दिया है।

