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दिशा की बैठक में भिड़े सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक,नियमों में रहिए इमरान मसूद

दिशा की बैठक में भिड़े सांसद इमरान मसूद और विधायक आशु मलिक,नियमों में रहिए इमरान मसूद

डिजिटल डेस्कः सहारनपुर में दिशा की बैठक में सांसद इमरान मसूद और देहात विधायक आशु मलिक के बीच नोकझोंक बैठक में समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक और कांग्रेस पार्टी के सांसद इमरान मसूद के बीच विकास कार्यों को लेकर तीखी बहस हुई है, इस बैठक में जिले के आलाधिकारियों के अलावा सपा सांसद इकरा हसन व अन्य विधायक भी मौजूद थे

आपको बता दे कि बीते दिन हुई दिशा की बैठक में सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की अध्यक्षता में हो रही बैठक में समाजवादी पार्टी के सहारनपुर देहात विधानसभा के विधायक आशु मलिक की सांसद इमरान मसूद के बीच नाली के निर्माण के मुद्दे को लेकर तीखी नोक झोंक हुई। इमरान मसूद व आशु मलिक के बीच पिछले कुछ समय से लगातार तनातनी चली आ रही है व एक दूसरे के विपरीत लगातार बयान बाजी कर रहे हैं, लेकिन कल दिशा की बैठक में आमने-सामने होने पर यह बयान बाजी बहस में बदल गई और दोनों के बीच जमकर नोक झोक हुई। इस बैठक में जिले के आलाधिकारियों के अलावा सपा सांसद इकरा हसन व अन्य विधायक गण भी मौजूद थे। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है

https://x.com/ASKNewsIndia/status/2089991849159381180?s=20

बता दें कि यह बहस सवालों को लेकर हुई है आशु मलिक जनता से जुड़े सवाल पूछ रहे थे और इसी इमरान मसूद ने बैठक के नियम का हवाला देते हुए कहा कि सवाल पूछने के लिए चेयर से अनुमति लेनी चाहिए। जिस पर आशु मलिक ने कहा कि सवाल मेरा है,यह मीटिंग है कोई आधिकारिक रैली नहीं है। इस पर इमरा मसूद गर्म हो गए और उन्होंने कहा कि मीटिंग नियम से चलेगी,चेयर की अनुमति के बिना नहीं चलेगी।

BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का तंज


इस पर उत्तर प्रदेश के BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने निशाना साधते हुए X पर पोस्ट कर कहा है कि उन्हें इधर उधर नहीं बल्कि अपने ‘स्वार्थ-बंधन’ का असली चेहरा देखना चाहिए। सहारनपुर की दिशा बैठक में समाजवादी पार्टी के विधायक और कांग्रेस सांसद के बीच हुई यह सरेआम तू-तू, मैं-मैं कोई इत्तेफ़ाक नहीं है.. यह इस ‘कुनबा-गठबंधन’ का असली चरित्र है। ये ‘महागठबंधन’ नहीं, कुर्सी के लालची ‘अवसरवादी मंच’ का ढोंग है। ना जनता के विकास की चिंता, ना क्षेत्र की समस्याओं से कोई सरोकार… इन्हें सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने और सत्ता की मलाई खाने से मतलब है। सत्ता के मोह में खड़ा किया गया ताश के पत्तों का यह ‘ग़लतफ़हमी-तंत्र’ अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। दावा ‘एकता’ का करते हैं, और ज़मीन पर आपस में ‘वर्चस्व की नूराकुश्ती’ का खेल खेलते हैं। आने वाले दिनों में इस ‘बेमेल ढोंग’ की इमारत ताश के पत्तों की तरह बिखरेगी और इनका असली घमासान सड़क पर दिखेगा।