डिजिटल डेस्क , गोरखपुर: रामगढ़ताल स्थित योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह एवं सांस्कृतिक केंद्र में शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में CM योगी बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 81 मेधावी शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया,माध्यमिक शिक्षा में जर्जर भवनों के लिए 1500 करोड़ से अधिक की राशि दी। CM योगी ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा उन्होंने कहा कि सपा सैफई महोत्सव का पैसा अगर शिक्षा पर खर्च करती तो लाखों बच्चों का भविष्य बनता।
आपको बता दे कि शिक्षक दिवस पर गोरखपुर में प्रदेश भर के 81 शिक्षकों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सम्मानित किया सीएम ने अपने हाथों पुरस्कार दिया, मुख्यमंत्री ने पुरस्कृत हुए शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये का प्रतीकात्मक चेक सौंपा। महिला शिक्षकों को माध्यमिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार गुलाब देवी ने और पुरुष शिक्षकों को बेसिक शिक्षा मंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने अंगवस्त्र पहनाया। सभी पुरस्कृत शिक्षकों को मां सरस्वती की प्रतिमा भी भेंट की गई। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त इन शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। साथ ही इनकी सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी।
CM योगी ने अखिलेश यादव पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि वर्ष 2017 के पहले जितना पैसा सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसमें से थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता.उन्होंने बर्मिंघम से रथ मंगाने के खर्च का भी जिक्र किया और कहा कि जो लोग काम नहीं कर सकते, वे सिर्फ प्रश्न खड़े करते हैं।
कल जन्माष्टमी थी कोई दंगा सुनाई पड़ा ! -CM योगी
पहले प्रदेश में कर्फ्यू और दंगों का माहौल रहता था, कल जन्माष्टमी थी, प्रदेश के सभी पुलिस लाइन,थानों,हर मोहल्ले में आयोजित हुआ,लेकिन कहीं कोई दंगा सुनाई पड़ा! क्या कोई कल्पना कर सकता था,
2017 से पहले ठेके पर नकल होती- CM
दंगो कर्फ्यू के माहौल में हमारे स्कूल कॉलेज चल सकते थे,आपने साढ़े 9 वर्षो में देखा होगा कहीं कोई उपद्रव नही,अब आप शिक्षको पर कोई प्रश्न नही खड़ा कर सकता.2017 के पहले क्या ये सच नही था कि ठेके पर नकल होती थी,यूपी पर प्रश्न खड़ा होता था,भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य कठघरे में खड़ा होता था,अपने बदलते UP को देखा है। 2017 के पहले जिस UP में लोग आना नही चाहते थे,UP का युवा और शिक्षक कहीं जाते थे तो शक से देखा जाता था।

