आइए जानते पूर्व PM शेख हसीना क्यों लौटना चाहतीं अपने वतन…

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डिजिटल डेस्क ः बांग्लादेश में साल 2024 में तख्तापलट होने के बाद से देश छोड़ चुकी पूर्व पीएम हसीना अब एक बार फिर से देश वापस आना चाह रही हैं। बता दें कि तख्तापलट के बाद उन्हें भारत लाया गया था, तब से वो यहीं पर निवास कर रही हैं। उनके खिलाफ 150 से ज्यादा केस दर्ज हैं। 10 मामलों में उन्हें दोषी भी ठहराया जा चुका है। बांग्लादेश की एक अदालत ने इसी साल मानवता के खिलाफ अपराध के मामले में हसीना को फांसी की सजा सुनवाई की थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हसीना वापस बांग्लादेश क्यों लौट रही हैं? हसीना वापस क्यों जा रही हैं? जानकारी के अनुसार शेख हसीना अपनी जिंदगी और सिसायत के आखिरी दौर से गुजर रही हैं। उन्होंने अपना जीवन बांग्लादेश को समर्पित किया है। उनके पिता बांग्लादेश के संस्थापक थे। शेख हसीना अपने जिंदगी का अंतिम समय अपने मुल्क में ही बिताना चाहती हैं। वह देश छोड़कर भागने वाली नेता की छवि को भी खत्म करना चाहती हैं। सूत्रों के अनुसार बता दें कि शेख हसीना का उनके देश में अभी मजबूत जनाधार बना हुआ है। दिसंबर 2024 में किए गए एक सर्वे में 57 प्रतिशत लोगों ने हसीना की पार्टी को बांग्लादेश में लोकतंत्र के लिए आवश्यक बताया था। फरवरी 2026 में प्रथम आलो सर्वे के अनुसार 25 प्रतिशत लोगों ने खुलकर आवामी लीग पर बैन के खिलाफ सवाल उठाए थे। इससे साफ होता है कि उनका बांग्लादेश में अच्छा जनाधार बना हुआ है।

बता दें कि बांग्लादेश में हसीना की छवि शुरू से ही धर्मनिरपेक्ष नेता की छवि रही है। बांग्लादेश के शहरी इलाकों में शेख हसीना काफी लोकप्रिय रही हैं। शेख हसीना की पूरी लड़ाई कट्टरपंथी जमात के खिलाफ रही है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में जमात का जुल्म काफी ज्यादा बढ़ गया है। शेख हसीना की पार्टी लगातार इसे मुद्दा बना रही है। हसीना के जाने के बाद अंतरिम सरकार ने संविधान में संशोधन के साथ चुनाव कराए। चुनाव में बीएनपी की जीत हुई, लेकिन सत्ता में आने के बाद तारिक रहमान ने उन संशोधनों को लागू नहीं किया। तारिक रहमान की सरकार पुराने ढर्रे पर ही चल रही है। ऐसे में आवामी लीग को बड़ा मुद्दा मिल गया है। शेख हसीना वापस लौटकर यह बताना चाह रही है कि मैं जो कर रही थी, वह गलत नहीं था। शेख हसीना की पार्टी समय के साथ कमजोर होती जा रही है। यदि वो अभी वापस नहीं लौटती हैं, तो आने वाले समय में आवामी लीग की स्थिति अधिक खराब हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तारिक रहमान की सरकार देश में नए सिरे से कानून लाने जा रही है, जिसके बाद हसीना की पार्टी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। इसलिए उनकी कोशिश है कि उससे पहले ही एक बड़ा जन आंदोलन शुरु किया जाए। हसीना की पार्टी के नेताओं के अनुसार बांग्लादेश के विकास की रफ्तार में ब्रेक सा लग गया है। बाहर के लोग देश में नहीं आना चाह रहे हैं। बीते दो वर्षों में बिल्कुल भी निवेश नहीं हुआ है। भारत से दुश्मनी के चलते कपड़े का उद्योग भी बंद हो गया है। इससे भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा अन्य पड़ोसी देश भी बांग्लादेश के साथ व्यापार करने से कदम पीछे खींच रहे हैं, जिससे देश की बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।