बहुचर्चित 25 वर्ष पुराने हत्याकांड में SC सख्त, UP सरकार दाखिल किया अनुपालन पत्र

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डिजिटल डेस्क : पिलखुवा के करीब 25 साल बहुचर्चित हत्याकांड और उससे जुड़े दूसरे हत्याकांड की जांच में कथित लापरवाही पाए जाने पर तत्कालीन विवेचक पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। सर्वोच्च न्यायालय के 20 जुलाई के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में अनुपालन शपथपत्र दाखिल करते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी एवं विवेचक रहे सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर पूरन सिंह मेहरा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है। सरकार ने उनके विरुद्ध सिविल सेवा विनियमावली के अनुच्छेद 351-ए के तहत कार्रवाई की मंजूरी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी कराया है। शपथपत्र के साथ संलग्न शासनादेश के अनुसार यह कार्रवाई वर्ष 2001 के केस क्राइम संख्या 221/2001 और वर्ष 2002 के केस क्राइम संख्या 228/2002 की जांच में सीबीआई की ओर से इंगित गंभीर कमियों के आधार पर की जा रही है। शासन ने पुलिस मुख्यालय को निर्देश दिया है कि मामले में जल्द आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। स्पष्ट किया गया है कि यह आदेश विशेष परिस्थितियों वाला मामला है और इसे अन्य मामलों में नजीर नहीं माना जाएगा।

जानकारी के लिए बता दें कि दस्तावेज के अनुसार तत्कालीन विवेचक पूरन सिंह मेहरा को एक अगस्त 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2001 में दर्ज तिहरे हत्याकांड की विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य जुटाए बिना मात्र 18 दिन के भीतर आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बरामद रक्तरंजित सामग्री को समय पर एफएसएल नहीं भेजा गया और महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 164 के तहत दर्ज नहीं कराए गए। इन कमियों के कारण अभियोजन प्रभावित हुआ और मामले में आरोपितों को लाभ मिला। नोटिस में लिखा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने स्थानीय पुलिस की जांच में गंभीर खामियां पाई थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष 2019 में सीबीआई को रिपोर्ट पर निर्णय लेने का निर्देश दिया। सीबीआई ने एक फरवरी 2022 की अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन विवेचक को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी। कारण बताओ नोटिस में सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर निर्णय लेते हुए उनकी पूरी पेंशन रोके जाने की कार्रवाई की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अभिलेखों का निरीक्षण करने की भी अनुमति दी गई है।

आइए जानते हैं यह था मामला ः
पिलखुवा में 24 जुलाई 2001 को राजेंद्र प्रसाद गर्ग की पुत्रवधू सीमा और दो मासूम बच्चों की गला रेतकर हत्या की गई थी। तत्कालीन पुलिस ने कई आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। बाद में मुख्य आरोपित नितिन गर्ग की जमानत पर रिहाई के बाद 16 जुलाई 2002 को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में एक अलग से मामला दर्ज किया गया था। मामला दर्ज होने के बाद नितिन गर्ग की मां की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतंत्र जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे सीबीआई जांच और अब विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई है।