जिला अस्पताल ः जानवरोंं की सिरिंग मंगाने के आरोप में निलंबित कर्मी को फिर मिली तैनाती

नोएडा ः जिला अस्पताल में जानवरों की 1.20 लाख सिरिंज मंगवाने के प्रकरण में प्रबंधन की मिलीभगत का एक और मामला सामने आया है। गंभीर लापरवाही बरतने पर निलंबित हुए स्टाफ कर्मी को गुप-चुप तरीके से डाटा आपरेटर की जिम्मेदारी दे दी गई। जिलाधिकारी मेधा रुपम ने आरोपित से सीएमएस आफिस के बराबर में डाटा एंट्री आपरेटिंग वाले कमरा नंबर-28ए काम कराने का संज्ञान लिया है। जिला प्रशासन की चल रही जांच में किसी को भी क्लीन चिट नहीं मिलने के बावजूद आउटसोर्स कर्मी से डाटा आपरेटर का काम कराने पर डीएम ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।
बता दें कि दिसंबर 2025 में जिला अस्पताल में जानवरों की सिरिंज मंगवाने के लिए जैम पोर्टल से दो बार आर्डर हुए थे। 60-60 हजार वैटरनरी सिरिंज के आर्डर अस्पताल में पहुंचे तो जांच में गड़बड़ी पकडी गई। तुरंत आला अफसरों ने आर्डर को वापस करा दिया। अस्पताल प्रबंधन ने तीन सदस्यीय कमेटी से मामले की जांच कराई तो लापरवाही सामने निकलकर आई। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डाटा एंट्री डाटा आपरेटर योगेश कुमार को निलंबित कर नशा मुक्ति केंद्र से अटैच कर दिया। हालांकि जांच अभी भी जारी है। इसमें तत्कालीन कार्यवाहक सीएमएस समेत अन्य चिकित्सक व स्टोर प्रबंधकों के बयान दर्ज हो चुके हैं, लेकिन किसी को भी क्लीन चिट नहीं मिली है। अब इसमें हैरान करने वाली यह बात निकल कर सामने आई है कि जिला प्रशासन की चल रही जांच के बीच में ही गुप-चुप तरीके से योगेश कुमार को फिर से डाटा एंट्री आपरेटर की जिम्मेदारी दे दी गई। उन्हें सीएमएस आफिस के बराबर वाले 28ए नंबर कमरे में बैठाया गया है जबकि उनकी मूल तैनाती नशा मुक्ति केंद्र में है।
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जानवरों की सिरिंज मंगवाने के प्रकरण में अभी जांच चल रही है। किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। पता चला है कि निलंबित आउटसोर्स कर्मी योगेश को डाटा एंट्री आपरेटर की जिम्मेदारी दी गई है। इसकी जांच कराकर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- मेधा रूपम, जिलाधिकारी, गौतमबुद्ध नगर
आउटसोर्स कर्मी योगेश कुमार नशा मुक्ति केंद्र में तैनात है। उससे डाटा एंट्री का काम ले लिया जाता है, जबकि अन्य लोग भी डाटा आपरेटिंग के लिए मौजूद हैं। उसको नौकरी से हटाया नहीं गया था।
-डा. अशोक कुमार झा-सीएमएस, जिला अस्पताल