डिजाटल डेस्क , सहारनपुर: कलेक्ट्रेट परिसर में बनी 70 साल पुरानी अवैध मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया है। बुलडोजर से कार्रवाई हुई है। सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध बताया था। कलेक्ट्रेट परिसर के सभी गेट को सील कर दिया गया था। किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश नहीं दिया गया। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में आज जिला प्रशासन ने कलेक्ट्रेट की 315 वर्ग मीटर जमीन पर बनी मस्जिद को शनिवार तड़के 5 बजे जिला प्रशासन ने 6 बुलडोजर चलाकर पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। जिला जज कोर्ट द्वारा मस्जिद पक्ष की याचिका खारिज किए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई। जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। जिला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना. मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को अपील दाखिल की थी और अदालत में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई थी।
क्या है पूरा मामला
आरोप था कि सरकारी जमीन पर बनी ये मस्जिद अवैध है। अदालत में मस्जिद कमेटी ने 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाकर निर्माण को पुराना बताया था, लेकिन प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि सहारनपुर में बिजली 1912 में आई थी। कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध कब्जे और व्यावसायिक इस्तेमाल पर कोर्ट ने ₹6.41 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है। सुरक्षा के लिए RAF व 10 थानों की पुलिस तैनात है। बता दे कि मस्जिद पक्ष की ओर से 1 जनवरी 1911 का बिजली का बिल दाखिल कर यह दावा किया गया था कि यह मस्जिद कलेक्ट्रेट से भी पहले की बनी हुई है। इसके प्रतिउत्तर में ठोस साक्ष्यों के आधार पर यह उजागर किया गया कि सहारनपुर शहर में बिजली 1922 में पहुँची थी और इसका वितरण 1928 से शुरू हुआ था, ऐसे में 1911 में बिजली का कनेक्शन प्राप्त होना असंभव है। इसके अतिरिक्त, 1 जनवरी 1911 को रविवार होने के कारण उस तिथि को कनेक्शन जारी होने का दावा भी पूरी तरह फर्जी साबित हुआ। इसके अलावा, फसली वर्ष 1296 (सन 1889) के खसरे के अनुसार मौजा पठानपुरा में खेवट ‘सरकार केसरी हिंद’ के रूप में कचहरी और कलेक्ट्रेट ही दर्ज होने से यह स्पष्ट हो गया कि कलेक्ट्रेट से पहले वहाँ किसी मस्जिद का अस्तित्व नहीं था। इस संदर्भ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि खसरा संख्या 539, रकबाई 28.04 बीघा यानी 5.780 हेक्टेयर ग्राम पठानपुरा, तहसील व जिला सहारनपुर कचहरी/कलेक्ट्रेट स्थित है, और खसरा संख्या 539 प्रदेश राज्य में निहित सरकारी संपत्ति है।
न्यायालय के इस संपूर्ण परीक्षण के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण विधिक बिंदु और निष्कर्ष स्पष्ट रूप से सामने आए उत्तर प्रदेश सरकार की मिल्कियत: राजस्व अभिलेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर यह पूरी तरह सिद्ध हो गया कि प्रश्नगत भूमि पर पूर्ण रूप से उत्तर प्रदेश सरकार का स्वामित्व है। वक्फ का अस्तित्व नहीं: विधिक दस्तावेजों और साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संपत्ति पर वक्फ का कोई कानूनी अस्तित्व नहीं पाया गया है। प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट 1991 की गैर-लागूता: अदालत ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि प्रश्नगत संपत्ति पर ‘प्लेसेज़ ऑफ़ वर्शिप एक्ट 1991’ का कोई प्रभाव नहीं है और ना ही यह अधिनियम इस अवैध संपत्ति पर किसी भी रूप में लागू होता है। इस फैसले के बाद सहारनपुर के कलेक्ट्रेट में कल से ही भारी पुलिस बल तैनात किया गया। और आज सुबह बुलडोजर लगाकर मस्जिद को ध्वस्त किया जा रहा है
मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है अभी तक शहर में हालात शांतिपूर्ण है प्रशासन द्वारा छपे चप्पे पर पुलिस बल तैनात किया गया है।
इकरा हसन हाउस अरेस्ट
मामले को लेकर राजनीतिक सक्रियता भी देर रात बढ़ गई. कैराना सांसद इकरा हसन के भी सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया गया.इस घटनाक्रम से साफ हो गया कि प्रशासन किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक जमावड़े को कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास नहीं होने देना चाहता था। उनके हाउस अरेस्ट किए जाने के संबंध में प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

