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जर्जर इमारत में बने प्राधिकरण के कार्यालय, हादसों का इंतजार …

जर्जर इमारत में बने प्राधिकरण के कार्यालय, हादसों का इंतजार …

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : सेक्टर-20 के जी-ब्लॉक मार्केट की जर्जर इमारतें कभी भी बड़ा हादसा कर सकती हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि इसी खतरे के बीच नोएडा प्राधिकरण के 7 डिवीजन के दफ्तर सालों से यहीं चल रहे हैं।

आलम यह है कि इमारतों की सरिया बाहर निकल आई हैं, ईंटें अलग हो रही हैं, छत और दीवारों से लगातार प्लास्टर गिर रहा है। दीवारों और छतों पर पीपल-बरगद के पेड़ उग आए हैं। इसके बावजूद यहां 40 से अधिक दुकानें चल रही हैं, जिनमें पंजाब नेशनल बैंक की ब्रांच, मेडिकल स्टोर और किराना दुकानें शामिल हैं। रोजाना सैकड़ों कर्मचारी, दुकानदार और ग्राहक जान जोखिम में डालकर यहां आते-जाते हैं।

डिवीजन शिफ्ट, लेकिन सामान अभी भी अंदर

सूत्रों के मुताबिक जी-ब्लॉक की इसी जर्जर बिल्डिंग में नोएडा प्राधिकरण के डिवीजन 5 और 6 समेत 7 डिवीजन संचालित हो रहे थे। शिकायतों के बाद कुछ दिन पहले ही डिवीजन 5 और 6 को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है, लेकिन इमारत से अभी तक फाइलें और सामान पूरी तरह हटाया नहीं गया है। कर्मचारी अब भी सामान निकालने के लिए जर्जर इमारत में जा रहे हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि छत से प्लास्टर गिरना रोज की बात है। कभी भी छज्जा या छत का हिस्सा गिर सकता है।

73 PWD मकान भी मौत को दावत दे रहे हैं

सिर्फ जी-ब्लॉक ही नहीं, ए और बी ब्लॉक में PWD के 73 सरकारी मकान भी पूरी तरह जर्जर हो चुके हैं। इनमें से सिर्फ 3 मकान ही आधिकारिक रूप से अलॉट हैं, बाकी में स्टाफ ने अवैध कब्जा कर रखा है। सेक्टर-27 में भी कई PWD मकानों की दीवारों और छतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, फिर भी कर्मचारी वहीं रह रहे हैं।

लोग मजबूर क्यों?
कर्मचारियों को ये मकान मुफ्त में मिले हुए हैं और बिजली-पानी समेत सारी सुविधाएं मिल रही हैं, इसलिए आर्थिक बोझ न होने के कारण वे खतरे के बावजूद यहीं रहने को मजबूर हैं।

RWA ने दी चेतावनी

सेक्टर-20 RWA अध्यक्ष रामपाल भाटी ने कहा, “इमारत की हालत बेहद खतरनाक है। अब मरम्मत से काम नहीं चलेगा, इसे पूरी तरह गिराकर नया निर्माण होना चाहिए। हमने कई बार प्राधिकरण और PWD को लिखित शिकायत दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किसी बड़े हादसे से पहले प्रशासन को सुरक्षा ऑडिट कराकर इसे खाली कराना चाहिए।”

सबसे बड़ा सवाल:

जब जिम्मेदारों का दफ्तर ही जर्जर इमारत में चल रहा है, तो आम लोगों की सुरक्षा की जांच कौन करेगा?