अध्यात्मिककानपुर

कानपुर में खेरेपति मंदिर में जीवित नागों से होता है भगवान शिव का अनोखा श्रृंगार

कानपुर में खेरेपति मंदिर में जीवित नागों से होता है भगवान शिव का अनोखा श्रृंगार

डिजिटल डेस्क, कानपुर : नाग पंचमी का पर्व कानपुर के ऐतिहासिक खेरेपति मंदिर में बेहद खास अंदाज में मनाया जा रहा है। माल रोड स्थित इस 200 साल पुराने मंदिर की मान्यता है कि यहां स्वयं शेषनाग का वास है । आज सुबह से ही दूर-दूर से श्रद्धालु और सपेरे अपने-अपने नागों को लेकर मंदिर पहुंचे ।

बता दें कि मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा है भगवान का जीवित नागों से श्रृंगार। नाग पंचमी के दिन यहां सपेरे कोबरा सहित दुर्लभ प्रजाति के जहरीले नाग लाते हैं । इन जीवित नागों को शीशे के खास कक्ष में भगवान विष्णु की प्रतिमा के साथ छोड़ा जाता है, जहां वे प्रतिमा से लिपटकर अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं । मंदिर प्रबंधक अनंत मिश्रा ने बताया कि भगवान खेरेपति शेषनाग का मंदिर होने के कारण इस क्षेत्र में कभी सर्प दशा की स्थिति नहीं होती। नाग पंचमी पर हमारे धर्म ग्रंथों में नागों की पूजा का विधान है। भगवान विष्णु क्षीरसागर में नाग शैया पर शयन करते हैं तो भगवान शिव नागों को अपने शरीर पर धारण करते हैं, जो दर्शाता है कि नाग कितने पूजनीय हैं।

श्रद्धालु भगवान विष्णु और शिव दोनों की एक साथ पूजा कर आशीर्वाद पाते हैं । मान्यता है कि यहां पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है । भक्त सोने-चांदी के नाग-नागिन चढ़ाकर मनोकामना मांगते हैं । रात में यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों लोगों की उपस्थिति होती है। भीड़ को देखते हुए आसपास की सड़कों को बंद कर दिया जाता है । जिलाधिकारी ने स्वयं मंदिर का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया ।