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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में इस बार 500 ड्रोन से दिखेगा भव्य नजारा

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा में इस बार 500 ड्रोन से दिखेगा भव्य नजारा

डिजिटल डेस्क: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पावन पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस वर्ष शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व को लेकर देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों में तैयारियां तेज हो गई हैं। खासकर मथुरा-वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

आधी रात को होगा श्रीकृष्ण का जन्म

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा की कारागार में देवकी और वासुदेव के घर आधी रात के समय हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशीथ काल यानी मध्यरात्रि में की जाती है।

2026 में दिल्ली के अनुसार निशीथ पूजा का समय लगभग रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी दौरान मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का अभिषेक, श्रृंगार, आरती और जन्मोत्सव किया जाएगा।

4 सितंबर को ही क्यों मनाई जाएगी जन्माष्टमी?

इस वर्ष अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात तक रहने के कारण अधिकांश स्थानों पर जन्माष्टमी का मुख्य पर्व 4 सितंबर को मनाया जाएगा। हालांकि अलग-अलग पंचांग परंपराओं और वैष्णव संप्रदाय की गणना के कारण कुछ स्थानों पर 5 सितंबर को भी जन्माष्टमी अथवा उससे जुड़े आयोजन देखने को मिल सकते हैं।

जन्माष्टमी के अगले दिन कई स्थानों पर नंदोत्सव और दही-हांडी जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस बार क्या है खास?

2026 की जन्माष्टमी मथुरा के लिए विशेष आकर्षण वाली रहने वाली है। मथुरा में जन्माष्टमी के अवसर पर प्रशासन की तैयारियों के बीच 500 ड्रोन के विशेष शो की योजना बनाई गई है। ड्रोन शो के जरिए धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियों को आसमान में प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे जन्मोत्सव का नजारा और भी भव्य होने की उम्मीद है।

वहीं मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, झांकियां, भगवान के बाल स्वरूप का श्रृंगार और मध्यरात्रि जन्मोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं।

मंदिरों में होगी विशेष पूजा-अर्चना

जन्माष्टमी के दिन श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं। कई घरों और मंदिरों में लड्डू गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर झूले में विराजमान किया जाता है। पंचामृत से अभिषेक के बाद माखन-मिश्री, पंजीरी, फल और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं।

भक्त दिनभर व्रत रखते हैं और रात में श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा-अर्चना कर व्रत खोलते हैं। मंदिरों में रात 12 बजे शंख, घंटियों और जयकारों के बीच जन्मोत्सव मनाया जाता है।

मथुरा-वृंदावन में उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा और उनकी बाल लीलाओं से जुड़े वृंदावन, गोकुल और बरसाना में जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर समेत प्रमुख मंदिरों में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जबकि वृंदावन के मंदिरों में भी जन्माष्टमी और उसके बाद नंदोत्सव को लेकर विशेष आयोजन होते हैं।

घरों में भी सजेंगे कान्हा के झूले

जन्माष्टमी को लेकर घरों में भी विशेष तैयारियां की जाती हैं। लोग अपने घरों में बाल गोपाल के लिए आकर्षक झूले और छोटी-छोटी झांकियां सजाते हैं। बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार करने की भी परंपरा है।

कई स्थानों पर कृष्ण लीला, भजन-कीर्तन, मटकी फोड़ प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

श्रद्धा और भक्ति का संदेश देता है पर्व

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि धर्म, कर्म, प्रेम और सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश देने वाला पर्व भी है। भगवान श्रीकृष्ण ने श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से कर्म और कर्तव्य का महत्व बताया। यही कारण है कि जन्माष्टमी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस वर्ष 4 सितंबर को जन्माष्टमी और 5 सितंबर को कई स्थानों पर नंदोत्सव/दही-हांडी के आयोजन होने की संभावना है। मथुरा में 500 ड्रोन शो जैसी विशेष तैयारियां 2026 के जन्मोत्सव को और आकर्षक बनाने वाली हैं।