डिजिटल डेस्क , फरीदाबाद : सूरजकुंड में राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘शी इज ए चेंज मेकर’ कार्यक्रम का समापन हुआ। समापन समारोह के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के. रहाटकर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल कानून और सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज की सोच में भी सकारात्मक और प्रगतिशील बदलाव जरूरी है।
उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून, नीतियां, पुलिस व्यवस्था और सरकार लगातार काम कर रही हैं। इसके बावजूद समय के साथ महिलाओं के सामने नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में केवल सरकार, पुलिस या कानून के भरोसे बदलाव संभव नहीं है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के प्रति लोगों की सोच को अधिक सम्मानजनक और प्रगतिशील बनाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा।
विजया रहाटकर ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य महिला जनप्रतिनिधियों में नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करना था। इसमें 25 से अधिक राज्यों की महिला विधायिकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में महिला स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं के संरक्षण से जुड़े कानून, घरेलू हिंसा, कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संबंधित कानून, सुरक्षा अधिकारियों और वन स्टॉप सेंटर जैसी व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि इन विषयों की जानकारी मिलने से महिला जनप्रतिनिधियां अपने-अपने क्षेत्रों में महिलाओं को बेहतर तरीके से सहायता उपलब्ध करा सकेंगी। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), शिक्षा और महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने भी पत्रकारों से बातचीत कर महिलाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के लिए समाज की सोच बदलना जरूरी: विजया रहाटकर

