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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज सुनवाई, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज सुनवाई, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

डिजिटल डेस्क, प्रयागराज : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। आज इस मामले पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच में सुनवाई होगी।

क्या है पूरा मामला?

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर में बनी दो मंजिला मस्जिद को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत पर प्रशासन ने इसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बताते हुए कार्रवाई शुरू की थी।

  • 16 जुलाई 2026: सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (बेदखली) अधिनियम 1972 के तहत मस्जिद को अवैध करार दिया और 30 दिन में हटाने का आदेश दिया। साथ ही प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का जुर्माना लगाया।
  • 2 सितंबर 2026: मस्जिद कमेटी ने जिला जज की अदालत में अपील की, जिसे जिला जज ने खारिज कर सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
  • 5 सितंबर 2026: प्रशासन ने 7 बुलडोजरों के साथ भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। मलबा हटाते समय वहां 15 फीट गहरा पुराना कुआं भी मिलने की बात सामने आई।

हाईकोर्ट में याचिका में क्या आरोप?

मस्जिद कमेटी के मुतवल्ली के बेटे मोहम्मद तनवीर अहमद की ओर से अधिवक्ता बाबर वसीम ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत रिट याचिका दाखिल की है। याचिका में राज्य सरकार को जिलाधिकारी के माध्यम से और शिया/सुन्नी वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया है।

याचिका में 3 बड़े आरोप लगाए गए हैं:

1. बिना नोटिस कार्रवाई: प्रशासन ने बिना किसी वैध नोटिस और बिना ध्वस्तीकरण आदेश के मस्जिद गिरा दी।
2. वर्शिप एक्ट का उल्लंघन: याचिका में Places of Worship Act 1991 के प्रावधानों की अनदेखी का आरोप है।
3. पीपी एक्ट पर सवाल: कमेटी का कहना है कि पीपी एक्ट के तहत कार्रवाई से पहले संपत्ति पर सरकार का स्वामित्व स्थापित होना जरूरी था, जो नहीं किया गया। कमेटी ने बिजली बिल और नगर पालिका असेसमेंट को अपने दावे के समर्थन में पेश किया था, जबकि प्रशासन ने राजस्व अभिलेख में जमीन को कचहरी-कलेक्ट्रेट के नाम दर्ज बताया। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत प्रशासन की कार्रवाई की वैधानिकता और निचली अदालतों की प्रक्रिया की समीक्षा करेगी। वहीं जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भी इस मामले में कानूनी मदद की बात कही है।