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ब्रिक्स सम्मेलन : नोएडा के निर्यातकों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद, नए खरीदार और बाजार मिलने की आस

ब्रिक्स सम्मेलन : नोएडा के निर्यातकों को कारोबार बढ़ने की उम्मीद, नए खरीदार और बाजार मिलने की आस
  • यूएई, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों में बाजार तलाशेंगे उद्यमी

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर नोएडा के निर्यातकों की नजरें टिकी हैं। सम्मेलन में भारत के साथ ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर रहने की उम्मीद है। ऐसे में नोएडा के उद्यमियों को इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल और आइटी-डिजिटल सेवाओं के क्षेत्र में नए खरीदार मिलने तथा मौजूदा बाजार में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है। निर्यातकों का मानना है कि सम्मेलन के बाद विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और कारोबारियों के साथ संपर्क बढ़ेगा, जिससे सीधे व्यापार के नए रास्ते खुल सकते हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (फियो) के मुताबिक ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग मजबूत होने से बाजार तक आसान पहुंच, सप्लाई चेन को बेहतर बनाने, निवेश बढ़ाने, तकनीकी सहयोग और भुगतान व्यवस्था को सुगम बनाने जैसे परिणाम सामने आ सकते हैं। इसका सीधा लाभ नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में उत्पादन करने वाले निर्यातकों को मिलने की संभावना है।

कई देशों में बाजार तलाश रहे निर्यातक

नोएडा के उद्यमी चीन, यूएई, रूस, सऊदी अरब, ब्राजील, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे बाजारों में कारोबार विस्तार की संभावनाएं तलाश रहे हैं। निर्यातकों के मुताबिक चीन इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मशीनरी और विभिन्न औद्योगिक इनपुट की आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण देश है। दूसरी ओर यूएई भारतीय उत्पादों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण बाजार बनकर उभरा है।

रूस और सऊदी अरब में नए खरीदार तलाशने के साथ ब्राजील, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका में भी निर्यात बढ़ाने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि ब्रिक्स के मंच पर देशों के बीच व्यापारिक संपर्क बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वहां के आयातकों और कारोबारियों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।

यूएई को निर्यात में बड़ा इजाफा

नोएडा विशेष आर्थिक क्षेत्र (एनएसईजेड) के आंकड़े भी यूएई के बाजार की बढ़ती अहमियत को दिखाते हैं। वर्ष 2024-25 में एनएसईजेड से यूएई को 10,532 करोड़ रुपये के उत्पादों का निर्यात हुआ। वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 5,899 करोड़ रुपये था। यानी एक साल में यूएई को होने वाले निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

इसी अवधि में अमेरिका को होने वाला निर्यात भी 3,077 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,546 करोड़ रुपये हो गया। ब्रिटेन को निर्यात 1,051 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,150 करोड़ रुपये पहुंचा। निर्यातकों का कहना है कि नए व्यापारिक समझौतों और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग बढ़ने से आने वाले वर्षों में इन बाजारों में भी निर्यात की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद

फियो के अनुसार ब्रिक्स सहयोगी देशों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल और टेक्सटाइल उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में इन क्षेत्रों से जुड़ी बड़ी संख्या में कंपनियां उत्पादन और निर्यात का काम कर रही हैं।

नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के लिए विशेष रूप से यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंपोनेंट और अन्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियां वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट से जुड़े उद्योग भी नए खरीदारों और नए देशों में प्रवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

आसान हो आयात-निर्यात की प्रक्रिया

उद्यमियों का कहना है कि केवल बाजार उपलब्ध होना ही पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग देशों के बीच माल की आवाजाही, कस्टम प्रक्रिया, भुगतान, लॉजिस्टिक्स और माल की सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को भी आसान बनाना जरूरी है। यदि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाता है तो छोटे और मध्यम निर्यातकों को भी इसका लाभ मिल सकता है।

राजदूतों के साथ बैठक से मिल सकता है सीधा बाजार

नोएडा के उद्यमियों के मुताबिक बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान विभिन्न देशों के राजदूतों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ बैठक का अवसर मिलता है। ऐसी बैठकों के माध्यम से भारतीय कंपनियां अपने उत्पादों को सीधे दूसरे देशों के आयातकों और कारोबारियों तक पहुंचा सकती हैं। इससे नए व्यापारिक संबंध बनने और लंबे समय के निर्यात ऑर्डर मिलने की संभावना रहती है।

उद्यमियों ने क्या कहा

डॉ. आलोक कुमार गुप्ता, सचिव, एनईए ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन नोएडा के उद्यमियों के लिए बड़ा अवसर है। एक साथ कई देशों के बाजार में भारतीय उत्पादों की सीधी पहुंच बनाने का रास्ता खुल सकता है।

अमित सिंघल, अध्यक्ष, लघु उद्योग भारती, नोएडा इकाई ने कहा कि आयात-निर्यात की प्रक्रिया को और आसान बनाने के साथ माल की सुरक्षा की गारंटी जरूरी है। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

विमला बाथम, उद्यमी ने कहा कि ऐसे सम्मेलनों के बाद कई देशों के राजदूतों और प्रतिनिधियों के साथ बैठक होती है। इससे उनके देशों के बाजार में सीधे प्रवेश का अवसर मिल सकता है।

नीतू सिंह, उद्यमी ने कहा कि रूस और ब्राजील भारत के पुराने साझेदार हैं। इनके अलावा ब्रिक्स में शामिल और अन्य देशों के साथ भी आने वाले समय में निर्यात बढ़ने की उम्मीद है।