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विभागों की खींचतान में अटके जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भटकने को मजबूर आमजन

विभागों की खींचतान में अटके जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, भटकने को मजबूर आमजन

डिजिटल डेस्क, कानपुर : शहर में जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोगों को नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। अलग-अलग विभागों की ओर से प्रमाणपत्र जारी करने की समयसीमा और प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता न होने से आवेदकों में असमंजस की स्थिति है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें एक विभाग से दूसरे विभाग भेजा जा रहा है। इससे बच्चों के स्कूल में दाखिले के अलावा बैंक, बीमा और अन्य जरूरी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

नगर निगम के जोन-2 के जोनल अधिकारी ध्रुव नारायण यादव के अनुसार, 21 दिन के भीतर किए गए जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र के आवेदनों पर नगर निगम स्तर से ही प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। 21 दिन से अधिक पुराने मामलों को जांच के लिए सीएमओ या एसीएम के पास भेजा जाता है। हालांकि, अन्य जोनों में नए आवेदन नहीं लिए जाने की शिकायतों के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। वहीं, सीएमओ हरिदत्त नेमी का कहना है कि पुरानी गाइडलाइन के अनुसार दो वर्ष तक पुराने मामलों में स्वास्थ्य विभाग के आदेश के आधार पर नगर निगम प्रमाणपत्र जारी करता है। दो वर्ष से अधिक पुराने मामलों में प्रशासन यानी एसीएम की अनुमति आवश्यक होती है।

एडीएम सिटी आलोक कुमार गुप्ता ने व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए बताया कि एक वर्ष के भीतर के जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगर निगम के सहयोग से बनाए जाते हैं। एक वर्ष से अधिक पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट या प्रशासन की संस्तुति आवश्यक होती है। प्रशासन ने किसी तरह की बड़ी पेंडेंसी से इनकार किया है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों में कमी या नियमों की जानकारी न होने के कारण आवेदन लंबित हो सकते हैं। फिलहाल नए शासनादेश के आने तक मौजूदा व्यवस्था के तहत ही प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे।