- संघ ने ठेकेदार, सुपरवाइजर व सचिव की भूमिका की जांच की उठाई मांग
डिजिटल डेस्क, हरियाणा : खरखौदा में अपनी मांगों को लेकर 41 दिन से धरने पर बैठे सफाई कर्मचारियों के बीच ठेका कर्मी सोनू की मौत के बाद आक्रोश बढ़ गया है। मंगलवार को छाती में दर्द की शिकायत के बाद सोनू को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था। हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआइ रोहतक रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद सफाई कर्मचारी संघ ने ठेकेदार, सुपरवाइजर और नगर पालिका सचिव की भूमिका की जांच कराने और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।
सफाई कर्मचारी संघ के जिला अध्यक्ष राजा भैया ने धरनास्थल पर पहुंचकर कर्मचारियों से घटना की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सोनू ठेके पर सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था और कर्मचारियों की ड्यूटी बहाल करने को लेकर चल रहे विवाद के कारण मानसिक दबाव में था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार के समझौते का पालन नहीं होने का आरोप
राजा भैया ने कहा कि हरियाणा सरकार और नगरपालिका कर्मचारी संघ के बीच हुए समझौते में ठेकेदार, एजेंसी और आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को वेतन देने के साथ ड्यूटी पर वापस लेने के संबंध में निर्णय हुआ था। उनके अनुसार प्रदेश की कई नगरपालिकाओं में 12 से 14 तारीख तक कर्मचारियों की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई, लेकिन खरखौदा में कर्मचारियों को अब तक ड्यूटी पर नहीं लिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और सुपरवाइजर की ओर से कर्मचारियों को कथित तौर पर यह कहा जा रहा था कि उन्हें काम पर नहीं लगाया जाएगा और उन्हें हटा दिया गया है। इससे कर्मचारियों में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। संघ का आरोप है कि सोनू भी इसी स्थिति को लेकर परेशान था।
छाती में दर्द के बाद बिगड़ी हालत
राजा भैया ने बताया कि मंगलवार को धरनास्थल पर सोनू ने साथियों को छाती में दर्द होने की जानकारी दी। उसकी तबीयत बिगड़ने पर साथी कर्मचारी उसे अस्पताल लेकर पहुंचे। हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे पीजीआइ रोहतक रेफर कर दिया। उपचार के दौरान सोनू की मौत हो गई।
सोनू की मौत की सूचना मिलते ही धरनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों में शोक की लहर दौड़ गई। कर्मचारियों ने घटना की निष्पक्ष जांच और परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।
सचिव की भूमिका पर भी उठाए सवाल
जिला अध्यक्ष राजा भैया ने नगर पालिका सचिव की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार और कर्मचारी संघ के बीच हुए समझौते के बाद नगर पालिका प्रशासन को कर्मचारियों की वापसी को लेकर समय रहते कदम उठाने चाहिए थे। उनका आरोप है कि यदि सचिव ने समय रहते मामले का संज्ञान लिया होता तो स्थिति को संभाला जा सकता था।
उन्होंने ठेकेदार, सुपरवाइजर और नगर पालिका सचिव की भूमिका की जांच कराने की मांग की। साथ ही कहा कि जांच में यदि किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी मौत की वजह
सोनू की मौत के वास्तविक कारण और उसके काम से जुड़े विवाद अथवा कथित मानसिक दबाव के बीच संबंध की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। संघ ने प्रशासन से पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- ठेका सफाई कर्मचारियों को तत्काल ड्यूटी पर वापस लेने की मांग
- सरकार और कर्मचारी संघ के समझौते को लागू करने की मांग
- सोनू की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
- ठेकेदार व सुपरवाइजर की भूमिका की जांच
- नगर पालिका सचिव की भूमिका की भी जांच
- दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग
- मृतक कर्मचारी के परिवार को उचित सहायता देने की मांग

