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राम मंदिर ट्रस्ट के CEO चयन : राजेश पांडेय के दावे का ट्रस्ट ने किया खंडन, कहा- 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार में हुए थे शामिल

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO चयन : राजेश पांडेय के दावे का ट्रस्ट ने किया खंडन, कहा- 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार में हुए थे शामिल

डिजिटल डेस्क, अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर उठे सवालों के बीच ट्रस्ट ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय की ओर से जितेंद्र मिश्र के साक्षात्कार में शामिल नहीं होने संबंधी दावे का ट्रस्ट ने खंडन किया है। ट्रस्ट की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट कहा गया है कि पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त) ने 11 अगस्त 2026 को पहली पाली में साक्षात्कार में हिस्सा लिया था। ट्रस्ट ने इसके समर्थन में चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजी प्रमाण होने की बात भी कही है।

5,585 आवेदनों से शुरू हुई थी चयन प्रक्रिया

ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरी की ओर से 14 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, CEO के चयन के लिए छह जुलाई 2026 को खोज समिति का गठन किया गया था। समिति को कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों की स्क्रीनिंग और मूल्यांकन के लिए दिल्ली-एनसीआर, पुणे और संबलपुर में एआई स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद बहु-स्तरीय मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई।

मूल्यांकन के बाद 16 अभ्यर्थियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। ट्रस्ट के मुताबिक इन अभ्यर्थियों ने 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में आमने-सामने की बातचीत और साक्षात्कार में हिस्सा लिया था।

पहली पाली में हुआ था जितेंद्र मिश्र का इंटरव्यू

ट्रस्ट ने विशेष रूप से स्पष्ट किया है कि एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त) भी अंतिम 16 अभ्यर्थियों में शामिल थे। उन्होंने 11 अगस्त को पहली पाली में साक्षात्कार प्रक्रिया में भाग लिया था। ट्रस्ट ने उनके साक्षात्कार में शामिल नहीं होने संबंधी दावे को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया है।

ट्रस्ट के अनुसार, चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों का दस्तावेजीकरण किया गया था। इसलिए जितेंद्र मिश्र के साक्षात्कार में शामिल होने और बाद में शीर्ष तीन अभ्यर्थियों में चुने जाने के संबंध में रिकॉर्ड मौजूद हैं।

राजेश पांडेय ने उठाए थे चयन प्रक्रिया पर सवाल

CEO के चयन को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय ने सवाल उठाए थे। एक पॉडकास्ट में उन्होंने दावा किया था कि जितेंद्र मिश्र चयन प्रक्रिया के साक्षात्कार चरण में शामिल नहीं हुए थे। इसी के बाद CEO चयन की प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हुईं और ट्रस्ट से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठी।

पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी CEO चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया की पारदर्शिता पर स्पष्टीकरण मांगा था। इसके बाद ट्रस्ट ने पूरी प्रक्रिया से जुड़े प्रमुख तथ्यों को सार्वजनिक करते हुए अपना पक्ष सामने रखा।

1 सितंबर को सौंपी गई अंतिम रिपोर्ट

ट्रस्ट के मुताबिक खोज समिति ने एक सितंबर 2026 को अपनी अंतिम रिपोर्ट और सिफारिशें न्यास को सौंपी थीं। इसके अगले दिन यानी दो सितंबर को समिति की ओर से अनुशंसित शीर्ष तीन अभ्यर्थियों के नाम सार्वजनिक किए गए।

इनमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त), संजय प्रतापसिंह विश्वास राव और श्रुति भारद्वाज शामिल थे। इसके बाद जितेंद्र मिश्र को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास का पहला CEO नियुक्त किया गया।

पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट ने बताया पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड

ट्रस्ट ने कहा कि CEO का चयन संस्थागत शासन और पारदर्शिता के निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया। चयन प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को दस्तावेजीकृत किया गया और अंतिम चरण में शामिल अभ्यर्थियों की पहचान अयोध्या में दर्ज की गई।

ट्रस्ट ने कहा कि वह चयन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता के लिए प्रतिबद्ध है और इससे संबंधित किसी भी जांच या सवाल का जवाब तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर देने के लिए तैयार है।

दावों के बीच ट्रस्ट का आधिकारिक पक्ष सामने आया

जितेंद्र मिश्र के साक्षात्कार में शामिल होने को लेकर उठे विवाद के बीच ट्रस्ट की ओर से जारी स्पष्टीकरण अब उसका आधिकारिक पक्ष है। ट्रस्ट ने साक्षात्कार की तारीख, पहली पाली और चयन प्रक्रिया में शामिल 16 अभ्यर्थियों का विवरण देकर अपने दावे को स्पष्ट किया है। वहीं, इस मुद्दे पर सवाल उठाने वाले पूर्व अधिकारियों की ओर से ट्रस्ट के स्पष्टीकरण पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, यह देखने वाली बात होगी।