– हालिया पायलट मौतों का हवाला देकर DGCA को पत्र, एयरलाइनों को मिली अस्थायी छूट वापस लेने का आग्रह
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली : पायलटों की थकान (फटीग) और उससे जुड़े संभावित विमानन सुरक्षा जोखिमों को लेकर फेडरेशन आफ इंडियन पायलट (एफआइपी) ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशंस (एफडीटीएल) नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग की है। एफआइपी अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने डीजीसीए के महानिदेशक को पत्र भेजकर एयरलाइन कंपनियों को दी गई एफडीटीएल संबंधी अस्थायी छूटों को तत्काल वापस लेने का आग्रह किया है।
फेडरेशन ने अप्रैल 2026 में एयर इंडिया के कैप्टन तरुणदीप सिंह और अकासा एयर के कैप्टन अर्जुन नायडू तथा सितंबर 2026 में एयर इंडिया के कैप्टन सन्नी असलादेकर की लेओवर या प्रशिक्षण के दौरान हुई मौतों का उल्लेख किया है। हालांकि, एफआइपी ने स्पष्ट किया है कि किसी आधिकारिक जांच में इन मौतों का सीधा संबंध पायलटों की थकान से स्थापित नहीं हुआ है। संगठन का कहना है कि कम उम्र के मेडिकल रूप से फिट पायलटों की असामयिक मौतों को देखते हुए रोस्टर, विश्राम, नींद और शरीर की जैविक घड़ी पर पड़ने वाले प्रभावों की व्यापक समीक्षा आवश्यक है।
कागजी अनुपालन से आगे बढ़ने की जरूरत
एफआइपी का कहना है कि विमानन सुरक्षा के लिए केवल निर्धारित उड़ान और ड्यूटी अवधि की सीमा का पालन पर्याप्त नहीं है। पायलट को वास्तविक रूप से कितनी नींद और आराम मिला, रात की ड्यूटी या लगातार उड़ानों का उस पर क्या प्रभाव पड़ा और उसकी जैविक घड़ी किस स्थिति में है, इन पहलुओं को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए।
फेडरेशन ने इस संदर्भ में 25 जनवरी 2024 की इंडोनेशिया की बाटिक एयर घटना का उदाहरण दिया है। संगठन के अनुसार, उस घटना में दोनों पायलट उड़ान के दौरान करीब 28 मिनट तक सो गए थे और विमान निर्धारित मार्ग से भटक गया था। एफआइपी का तर्क है कि यह घटना बताती है कि नियमों का औपचारिक अनुपालन होने के बावजूद थकान सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर एफआरएमएस की निगरानी की मांग
फेडरेशन ने डीजीसीए के नेतृत्व में राष्ट्रीय फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम (एफआरएमएस) ओवरसाइट कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके तहत एयरलाइनों में पायलटों की थकान से जुड़े जोखिमों की नियमित निगरानी और मूल्यांकन की व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है।
एफआइपी ने एयरलाइनों से प्रत्येक तिमाही फटीग रिपोर्ट लेने का भी प्रस्ताव रखा है। संगठन के अनुसार, ऐसी रिपोर्टों से उन रूट और रोस्टर पैटर्न की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां पायलटों पर थकान का जोखिम अधिक हो सकता है।
पायलटों की स्वास्थ्य घटनाओं की वैज्ञानिक समीक्षा
फेडरेशन ने वर्ष 2023 से 2026 के बीच पायलटों में हुई स्वास्थ्य और हृदय संबंधी घटनाओं की निष्पक्ष वैज्ञानिक समीक्षा कराने की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि अध्ययन के जरिए यह समझने में मदद मिलेगी कि ड्यूटी पैटर्न, नींद और अन्य कार्य परिस्थितियों का पायलटों के स्वास्थ्य पर कोई संभावित प्रभाव है या नहीं।
इसके अलावा एफआइपी ने एफडीटीएल और एफआरएमएस से जुड़े भविष्य के सभी महत्वपूर्ण विचार-विमर्श में पायलट संगठनों को शामिल करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पायलटों के व्यावहारिक अनुभव को नियमों की समीक्षा और सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए।
अस्थायी छूटों की समीक्षा की मांग
एफआइपी ने एयरलाइन कंपनियों को एफडीटीएल से संबंधित दी गई अस्थायी छूटों की भी समीक्षा करने और उन्हें समाप्त करने का आग्रह किया है। अब फेडरेशन की मांगों पर डीजीसीए के रुख पर नजर है।
एफआइपी की प्रमुख मांगें
- एफडीटीएल नियमों का पूर्ण और सख्त पालन।
- एयरलाइनों को दी गई अस्थायी छूटों की समीक्षा और समाप्ति।
- राष्ट्रीय स्तर पर एफआरएमएस ओवरसाइट कार्यक्रम।
- एयरलाइनों से तिमाही फटीग रिपोर्ट लेने की व्यवस्था।
- 2023 से 2026 तक पायलटों की स्वास्थ्य एवं हृदय संबंधी घटनाओं की वैज्ञानिक समीक्षा।
- एफडीटीएल और एफआरएमएस से जुड़े विमर्श में पायलट संगठनों की भागीदारी।

