शिवली स्थित जागेश्वर की शिवलिंग का आखिरी छोर कहां, आइए जानते हैं…
रामप्रकाश श्रीवास्तव, संवाददाता
कानपुर देहात। श्रावण मास भगवान शंकर की आराधना से जुड़ा है इस महीने में लोग हर प्रकार से आनंदित होते हैं वही भगवान शंकर की आराधना में उनके आगे नतमस्तक होकर अपने कल्याण की कामना करते हैं। भगवान शिव की आराधना का पूरा महीना बम भोले के जयकारों से गूंजता है मानो यह कह रहा हो कि कृपा ईश्वर सब पर कृपा करने के लिए साक्षात धरती पर उतर कर मानव में समा रहा हो। इसी महीने में भगवान शंकर ने माता पार्वती से विवाह से किया था यह लौकिक जगत के लिए सदा शिव की धारणाओं को स्पष्ट करने का महीना है।शिव देवों के देव महादेव हैं।कामदेव के अहम को इसी माह में भगवान शिव ने चकनाचूर किया था। सावन का महीना शुरु होते ही कस्बा शिवली स्थित अति प्राचीन जागेश्वर मंदिर में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ता है आस्था का प्रतीक शिव मंदिर में श्रद्धालुओं का आवागमन सावन के महीने भर अनवरत चला करता है। सावन महीने में जागेश्वर धाम में देर रात तक हर हर महादेव बम भोले के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहता है।
सावन महीने में भगवान शिव की आराधना एवं उनके चरणों में बैठने का अलग लाभ है श्रावण मास में शिव भक्त गंगाजल लेकर कावड़ यात्रा करते हुए अपने-अपने शिवालयों में जल चढ़ाते हैं भगवान शिव का एक नाम आशुतोष भी है जब सभी देवगढ़ योगनिद्रा में नहीं हो तब एकमात्र भोलेनाथ ही भक्तों के अभीष्ट होते हैं आषाढ़ शुक्ल एकादशी से लेकर कार्तिक शुक्ल दशमी तक को चातुर्मास कहा जाता है इस अवधि में सभी देवगन आराम की मुद्रा में होते हैं तब भक्तगण देवाधिदेव महादेव की ही उपासना करते हैं मिली जानकारी के अनुसार सैकड़ों वर्ष पुराने जागेश्वर मंदिर की अजीबो गरीब दास्तान है इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग के आसपास वर्षों पहले विशाल जंगल हुआ करता था जहां बनजारे अपने जानवर चराने जाया करते थे उन बंजारों की एक गाय अक्सर शाम को झुंड से अलग होकर शिवलिंग के पास जाया करती थी और शिवलिंग के पास खड़े होते ही उस गाय का सारा दूध अपने आप शिवलिंग पर गिर जाता था काफी दिनों से हो रही इस अप्रत्याशित घटना को भापकर बंजारों ने उस गाय का पीछा किया और उस स्थान को खोज निकाला जहां मिट्टी के नीचे दबे शिवलिंग पर उस गाय का दूध अपने आप गिर जाता था बंजारों ने इस बात की जानकारी कस्बे के लोगों को दी दूसरे ही दिन से कस्बे के सैकड़ों लोगों ने मिलकर उस स्थान की सफाई कर मिट्टी को खोजना शुरू कर दिया कुछ मिट्टी के हटते ही भगवान शिव का शिवलिंग दिखाई पड़ा भगवान शंकर के शिवलिंग को खोदकर दूसरी जगह पर स्थापित करने के उद्देश्य से काफी गहराई तक खुदाई की गई लेकिन भगवान के शिवलिंग को बाहर नहीं निकाला जा सका तब तक कुछ प्रबुद्ध लोगों ने उसी स्थान पर सफाई करके पूजन पाठ शुरु कर दिया सिवनी क्षेत्र वासियों का यही मत है की इस कस्बे का नाम शिवली इसी शिवलिंग की वजह से रखा गया है आज भी इस कस्बे को लोग शिव की नगरी के नाम से जानते हैं आज इस सिद्ध स्थान पर काफी दूर दूर से भक्तों का आना-जाना लगा रहता है यहां पर श्रावण मास में ओम नमः शिवाय का अनवरत जाप एवं रुद्राभिषेक का कार्यक्रम चला करता है आज यह स्थान क्षेत्रीय लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है लोगों का विश्वास है कि शिव के दर पर जो मुराद मांगी जाती है वह जरूर पूरी होती है।