आइए जानते हैं इस सावन माह के सोमवार में क्या रहने वाला खास, इस तरह से करें पूजा-अर्चना
डिजिटल डेस्क । सावन का महीने का तीन अगस्त को पहला सोमवार पड़ रहा है। यह हिंदू धर्म का बेहद पावन महीना है। इसे लेकर जगह-जगह मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस महीने महिलाएं सज धजकर अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। यह तो सभी जानते हैं कि सावन शिव भक्तों के लिए एक पूजा साधना का महत्वपूर्ण पर्व है, लेकिन क्या कोई यह जानता है कि कैसे इस श्रावण मास की उत्पत्ति हुई। इसका शास्त्रों में क्या उल्लेख है। इस लेख के माध्यम से आपको इस विशेष पर्व की उत्पत्ति के विषय में बताने जा रहे हैं।
30 जुलाई से शुरु हुआ था श्रावण मास
इस साल 2026 में सावन श्रावण मास का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ है। सनातन धर्म में इस पवित्र महीने को विशेष महत्व दिया गया है। पर्व का सालों से भक्तों को इंतजार रहता है। आस्था श्रद्धा से जुड़े इस पर्व में श्रद्धालु बड़े धूमधाम से भोले को जल अर्पण कर उनकी भक्ति लीन हो जाते हैं। महीने बारिश से प्रकृति भी हरी भरी हो जाती है।
जानिए किस तारीख को पड़ेगा सोमवार
पहला सोमवार- 3 अगस्त
दूसरा सोमवार- 10 अगस्त
तीसरा सोमवार- 17 अगस्त
चौथा सोमवार- 24 अगस्त
सावन महीने की कहानी समुद्र मंंथन से है जुड़ी
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार, श्रावण मास की उत्पत्ति श्रवण नक्षत्र से है. श्रवण नक्षत्र पूर्णिमा के दिन पड़ता है, इसलिए इसे श्रावण मास कहते हैं। श्रावण मास में सबसे बड़ी विशेषता समुद्र मंथन को लेकर है। इसी समय देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन किया गया था, उस समय भी श्रावण मास था। इस मास में माता पार्वती ने शिवजी के लिए 108 वर्ष तक तपस्या की थी। इसलिए भी यह समय काफी विशेष रहा और इसको काफी महत्व दिया गया है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने अपने गले में धारण किया था, जिससे उनका नाम नीलकंठ पड़ा था। पौराणिक कथा के मुताबिक, माता सती ने अपने देह त्यागने से पहले शिवजी को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था अगले जन्म में माता पार्वती ने सावन के महीने में ही निराहार रहकर कठोर व्रत किया और शिवजी को प्रसन्न कर उनसे विवाह किया था इसलिए शिवजी को सावन का महीना अति प्रिय है. यही वजह है कि इस महीने में कुवारी कन्याएं मनचाहे वर के लिए यह व्रत रखती हैं। सावन का महीना बारिश का होता है. इस समय प्रकृति हरी भरी हो जाती है। इसलिए भी भोलेनाथ को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है।