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परी चौक के अवैध बस अड्डे से हर महीने 18 करोड़ की कमाई, रोज 4 हजार यात्री सफर को मजबूर

परी चौक के अवैध बस अड्डे से हर महीने 18 करोड़ की कमाई, रोज 4 हजार यात्री सफर को मजबूर
  • 70-80 बसें रोजाना भरती हैं फर्राटा, 500 से 2,000 रुपये तक किराया; नियमों की अनदेखी कर यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : शहर के मुख्य द्वार कहे जाने वाले परी चौक पर अवैध रूप से संचालित बस अड्डे का नेटवर्क लगातार बढ़ता जा रहा है। यहां से रोजाना करीब 70 से 80 बसें उत्तर प्रदेश के साथ ही बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों के लिए रवाना होती हैं। इन बसों में प्रतिदिन करीब चार हजार यात्रियों के सफर करने का दावा है। यात्रियों से रूट के अनुसार 500 से 2,000 रुपये तक किराया वसूला जाता है। इस आधार पर औसत किराया करीब 1,500 रुपये मानें तो रोजाना लगभग 60 लाख रुपये और 30 दिन में करीब 18 करोड़ रुपये का कारोबार बैठता है।

परी चौक से राज कल्पना ट्रैवल्स, कल्पना ट्रैवल्स, प्रिया ट्रैवल्स समेत कई कंपनियों की बसें संचालित होने की जानकारी है। इन बसों का संचालन लखनऊ, कानपुर, कानपुर देहात, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, आजमगढ़, आगरा, बलिया, झांसी, ग्वालियर, बांदा, महोबा, हमीरपुर, उरई, राठ, चरखारी और बेलाताल समेत प्रदेश के विभिन्न शहरों तक होता है। इसके अलावा पटना, मुजफ्फरपुर, हरिद्वार और देहरादून समेत दूसरे राज्यों के रूट पर भी बसें चलती हैं।

क्षमता से अधिक यात्रियों का आरोप

बसों में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने के आरोप भी सामने आते रहे हैं। लंबी दूरी के इन रूट पर चलने वाली बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ाकर संचालक अधिक कमाई करते हैं। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, कई बसों के संचालन के दौरान परमिट, फिटनेस, टैक्स और निर्धारित यात्री क्षमता जैसे नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

कई जिलों और राज्यों की सीमाएं होती हैं पार

परी चौक से निकलने वाली बसें सफर के दौरान कई जिलों, मंडलों और राज्यों की सीमाएं पार करती हैं। ऐसे में परिवहन विभाग की जांच व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का आरोप है कि रास्ते में जांच होने के बावजूद बसें लगातार लंबी दूरी तय कर रही हैं। यदि परमिट, फिटनेस, यात्री क्षमता और अन्य दस्तावेजों की जांच प्रभावी ढंग से हो तो नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर कार्रवाई की जा सकती है।

हादसा होने के बाद ही परिवहन विभाग की सक्रियता बढ़ने और कुछ दिन बाद फिर कार्रवाई सुस्त पड़ने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में परी चौक से संचालित हो रहे बस अड्डे पर प्रभावी कार्रवाई और नियमित जांच की जरूरत है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।