देशदिल्ली

30 लाख के 265 चालान बकाया, बीमा भी खत्म; फिर भी सड़कों पर फर्राटा भर रही बस

30 लाख के 265 चालान बकाया, बीमा भी खत्म; फिर भी सड़कों पर फर्राटा भर रही बस
  • यमुना एक्सप्रेसवे पर रियलिटी चेक में खुली पोल, परमिट उल्लंघन से लेकर क्षमता से अधिक सवारी बैठाने के आरोप

डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर : लगातार हो रहे बस हादसों के बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप सामने आ रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे के जेवर टोल प्लाजा पर एक ऐसी बस सामने आई, जिसके 265 चालान में करीब 30 लाख रुपये की धनराशि बकाया है। अलीगढ़ में पंजीकृत बस संख्या यूपी 81 सीटी 9015 का बीमा भी 29 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद बस लंबी दूरी के रूट पर यात्रियों को लेकर फर्राटा भरती मिली।

यमुना एक्सप्रेसवे पर किए गए रियलिटी चेक में कई अन्य बसों में भी हजारों रुपये के चालान बकाया मिले। इनमें बिहार समेत दूसरे राज्यों में पंजीकृत बसें शामिल थीं। जांच के दौरान बीआर 02 पीए 9339, बीआर 31 पीबी 6591 और बीआर 01 पीएस 2558 समेत अन्य वाहनों की स्थिति परखी गई। इनमें यातायात नियमों और परमिट की शर्तों के उल्लंघन से संबंधित चालान दर्ज मिले।

चालान कटते रहे, सड़क पर दौड़ती रहीं बसें

जांच में सामने आया कि कई बसों पर परमिट की शर्तों का उल्लंघन, निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाने, माल ढुलाई और अन्य नियमों के उल्लंघन के चालान दर्ज हैं। इसके बावजूद चालान की धनराशि जमा नहीं होने और लगातार नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बीच बसों का संचालन जारी है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली और गाजियाबाद से रोजाना बड़ी संख्या में निजी बसें बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के लिए रवाना होती हैं। इनमें कानपुर, लखनऊ, हमीरपुर, मौदाहा, झांसी, वाराणसी, प्रयागराज, राठ और बुंदेलखंड समेत कई रूट शामिल हैं। कई बसें दूसरे राज्यों में पंजीकृत होने के कारण अलग-अलग राज्यों की सीमाओं से होकर गुजरती हैं।

पांच से अधिक बार उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रविधान

मोटर वाहन अधिनियम में बार-बार नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई का प्रविधान है। एक वर्ष में पांच से अधिक बार नियम उल्लंघन सामने आने पर परमिट के निलंबन या निरस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है। परमिट की शर्तों के उल्लंघन पर धारा 86 के तहत कार्रवाई और वाहन को सीज करने के लिए धारा 207 के प्रविधान हैं। वहीं बिना परमिट या परमिट की निर्धारित शर्तों के उल्लंघन पर धारा 192ए के तहत दंड का प्रविधान है।

इसके बावजूद सवाल यह है कि लाखों रुपये के चालान और लगातार नियम उल्लंघन के मामलों के बाद भी ऐसे वाहनों का संचालन कैसे जारी है। केवल चालान काटे जाने के बजाय बकाया वसूली और नियमानुसार आगे की कार्रवाई नहीं होने से प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

कार्रवाई जारी रहेगी

एआरटीओ प्रवर्तन उदित नारायण ने कहा, “निजी बसों की जांच को लेकर लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जाती रही है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।”