किसने लिखा ‘जन गण मन’, क्यों लिखा और कब बना राष्ट्रगान? जानिए पूरा इतिहास

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रवि शर्मा, नई दिल्ली: भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ देश की एकता, विविधता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। इसकी कहानी आजादी के बाद नहीं, बल्कि 1911 में शुरू हुई थी। महान कवि और साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसकी रचना की थी। इसका मूल नाम ‘भारत भाग्य विधाता’ था और वर्तमान राष्ट्रगान इसी रचना के पहले पद पर आधारित है।

1911 में हुई थी रचना

‘जन गण मन’ की रचना 1911 में हुई। इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों और प्राकृतिक स्वरूप का उल्लेख किया गया है। पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा, द्रविड़, उत्कल और बंग के साथ हिमालय, गंगा, यमुना और समुद्र का जिक्र भारत की विविधता को दर्शाता है।

27 दिसंबर 1911 को पहली बार गाया गया

राष्ट्रगान के रूप में पहचाने जाने वाले इस गीत को पहली बार 27 दिसंबर 1911 को कलकत्ता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था। उस समय भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और देश का कोई आधिकारिक राष्ट्रगान नहीं था।

जॉर्ज पंचम से जुड़ा विवाद

‘जन गण मन’ को लेकर सबसे बड़ा विवाद इसके ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम की प्रशंसा में लिखे जाने के दावे को लेकर रहा। 1911 में जॉर्ज पंचम भारत आए थे, इसलिए दोनों घटनाओं को जोड़कर यह दावा किया गया। हालांकि, रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वयं इस व्याख्या का खंडन किया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि गीत में जिस ‘भारत भाग्य विधाता’ का उल्लेख है, वह किसी ब्रिटिश शासक के लिए नहीं है।

कौन थे रवींद्रनाथ टैगोर?

टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कलकत्ता में हुआ था। उनके पिता देबेंद्रनाथ टैगोर प्रसिद्ध समाज सुधारक और ब्रह्म समाज से जुड़े प्रमुख व्यक्तित्व थे। टैगोर ने साहित्य की अनेक विधाओं में योगदान दिया। 1913 में ‘गीतांजलि’ के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

1950 में बना राष्ट्रगान

आजादी के बाद राष्ट्रगान को लेकर संविधान सभा में चर्चा हुई। आखिरकार 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की कि ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान होगा। इसी घोषणा में ‘वंदे मातरम्’ को भी समान सम्मान और समान दर्जा देने की बात कही गई।

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