तिरंगे के सम्मान में लिखी गई वो अमर पंक्तियां, ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ का पूरा इतिहास

रवि शर्मा, नई दिल्ली: देशभक्ति के गीतों की बात होती है तो ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा’ की पंक्तियां आज भी लोगों के मन में जोश भर देती हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में लिखा गया यह गीत तिरंगे को राष्ट्रीय सम्मान और स्वाधीनता के संघर्ष से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण रचना बन गया। इसके रचयिता श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ थे, जिन्होंने अपनी लेखनी के जरिए आजादी के आंदोलन में राष्ट्रीय चेतना जगाने का काम किया।
1924 में लिखी गई थी तिरंगे की शान में कविता
श्यामलाल गुप्त ने 3 मार्च 1924 की रात इस प्रसिद्ध झंडा गीत की रचना की थी। उस समय देश में स्वतंत्रता आंदोलन जोर पकड़ रहा था और राष्ट्रीय ध्वज स्वराज तथा अंग्रेजी शासन के विरोध का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका था।
स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी ने श्यामलाल गुप्त को झंडे के लिए गीत लिखने के लिए प्रेरित किया था। इसके बाद गुप्त ने ऐसी रचना तैयार की, जिसे आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन की सभाओं और जुलूसों में व्यापक रूप से गाया जाने लगा।
कौन थे श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’?
श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ का जन्म 9 सितंबर 1896 को कानपुर जिले के नरवल में हुआ था। वे कवि होने के साथ-साथ शिक्षक, पत्रकार, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी भी थे। वे राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े और अंग्रेजी शासन के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। उनके जीवन का बड़ा हिस्सा देश की स्वतंत्रता और सामाजिक जागरूकता के कार्यों में बीता।
कानपुर के फूलबाग में पहली बार गूंजा गीत
इस गीत के इतिहास में कानपुर के फूलबाग का विशेष महत्व है। 13 अप्रैल 1924 को जलियांवाला बाग हत्याकांड की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम में इसका सामूहिक गायन हुआ। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। इसके बाद ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ स्वतंत्रता आंदोलन की सभाओं, जुलूसों और ध्वजारोहण कार्यक्रमों में लोकप्रिय होता गया। गीत की सरल भाषा और तिरंगे के प्रति सम्मान का संदेश इसे आम लोगों तक पहुंचाने में खास साबित हुआ।
लाल किले से भी गूंजा था झंडा गीत
आजादी मिलने के बाद भी इस गीत की लोकप्रियता कम नहीं हुई। 1952 में श्यामलाल गुप्त ने दिल्ली के लाल किले से स्वयं इस झंडा गीत का गायन किया। यह उनके जीवन और गीत के इतिहास का एक यादगार अध्याय माना जाता है। स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्र के प्रति उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 1973 में पद्मश्री से सम्मानित किया।
तिरंगा बना गीत का केंद्र
‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तिरंगे को केवल कपड़े के एक टुकड़े के रूप में नहीं, बल्कि स्वाधीनता, स्वाभिमान और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में देखा गया। जिस दौर में यह गीत लिखा गया, उस समय राष्ट्रीय ध्वज के प्रति लोगों की भावनाएं स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ी थीं। इसलिए गीत की पंक्तियां आंदोलनकारियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुईं। आज स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर जब तिरंगा शान से लहराता है और ‘झंडा ऊंचा रहे हमारा’ की आवाज सुनाई देती है, तो यह गीत भारत के उस दौर की याद दिलाता है जब देश की आजादी के लिए लाखों लोगों ने संघर्ष किया था।