लाल किले पर पीएम मोदी ने फहराया तिरंगा, भाषण में युवाओं से लेकर आत्मनिर्भर भारत तक पर जोर

रवि शर्मा, नई दिल्ली: भारत ने शनिवार 15 अगस्त 2026 को 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया और देशवासियों को संबोधित किया। आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित इस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी विशेष महत्व रहा। आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया।
ध्वजारोहण से पहले प्रधानमंत्री ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद लाल किले पहुंचने पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। प्राचीर पर पहुंचकर प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के दौरान 21 तोपों की सलामी दी गई और भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई।
पीएम मोदी के भाषण की प्रमुख बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनने के लिए उत्पादन, तकनीक, ऊर्जा और रक्षा समेत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ानी होगी। प्रधानमंत्री ने देश के विकास के लिए ‘सप्तधारा’ का रोडमैप सामने रखा। इसमें मैन्युफैक्चरिंग, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, तकनीक व इनोवेशन, लॉजिस्टिक्स, रक्षा, ग्रीन एवं ब्लू इकोनॉमी और भारत की सॉफ्ट पावर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
युवाओं के लिए बड़े ऐलान
पीएम मोदी ने युवाओं को देश के भविष्य की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए एक करोड़ युवाओं को अगले एक वर्ष में एआई प्रशिक्षण देने और गरीब तथा मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की। उन्होंने युवाओं से नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने और देश के विकास में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने युवाओं से जनगणना की प्रक्रिया में भी डिजिटल माध्यम से सहयोग करने की अपील की, ताकि परिवारों से जुड़ी जानकारी सही तरीके से दर्ज हो सके।
सेमीकंडक्टर और परमाणु ऊर्जा पर जोर
प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के लिए घरेलू उत्पादन बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर निर्माण को विस्तार देने और ऊर्जा क्षेत्र में भारत की क्षमता बढ़ाने की बात कही। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में 2047 तक 100 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य भी सामने रखा गया।
‘दिमागी नक्सल’ को लेकर चेतावनी
पीएम मोदी ने देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक एकता का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए वैचारिक तौर पर देश को कमजोर करने वाली सोच के खिलाफ सतर्क रहने की बात कही और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना भी जताई और भरोसा दिलाया कि संकट की घड़ी में सरकार और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।