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पशुओं के बेहतर विकास के लिए जरूरी है मातृ देखभाल, कृत्रिम करता है कमजोर

पशुओं के बेहतर विकास के लिए जरूरी है मातृ देखभाल, कृत्रिम करता है कमजोर

डिजिटल डेस्क : पशुओं के बेहतर विकास और अच्छी देखभाल के लिए मातृ पालन बेहतर माना जाता है। कृत्रिम पालन पशुओं के विकास में प्रभाव डालने के साथ ही उनके जीवंत रहने की उम्र को भी कम करता है। कृषि प्रणालियों में कई बार नवजात पशुओं को भोजन, गर्माहट और कोलोस्ट्रम उपलब्ध कराने तक ही देखभाल सीमित रह जाती है, जबकि मातृ देखभाल के लाभ इससे कहीं अधिक व्यापक हैं। कृत्रिम पालन पशुओं के विकास में असर डालता है। यह बातें गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित आइएसएई 2026 के कार्यक्रम में विशेषज्ञों के मंथन के दौरान निकलकर आई हैं। मां का दूध भी केवल पोषण का स्रोत नहीं है, बल्कि इसमें हार्मोन, वृद्धि कारक और प्रतिरक्षा से जुड़े अणुओं सहित अनेक जैव सक्रिय तत्व पाए जाते हैं। स्तनपान के दौरान इन तत्वों की संरचना में परिवर्तन होता रहता है, जिसे कृत्रिम पालन व्यवस्था में पूरी तरह दोहराना संभव नहीं है। शोध से स्पष्ट होता है कि कृत्रिम तरीके से पशुओं को जीवित रखना संभव है, लेकिन मातृ देखभाल से मिलने वाले अनेक महत्वपूर्ण अनुभव और व्यवहारिक कौशल उनसे छूट सकते हैं। इसलिए पशुपालन में केवल जीवित रहने पर नहीं, बल्कि पशुओं के स्वस्थ, प्राकृतिक और समग्र विकास पर भी ध्यान देना आवश्यक है। वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि मां से मिलने वाली देखभाल संतानों को सुरक्षा, भावनात्मक आराम, पर्यावरण की समझ, सामाजिक व्यवहार और प्रजाति-विशिष्ट व्यवहार सीखने में मदद करती है। मां और बच्चे के बीच समय से पहले अलगाव का प्रभाव सीखने, सामाजिक विकास, खेल तथा वयस्क जीवन की परिस्थितियों से निपटने की क्षमता पर पड़ सकता है। अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि मां के साथ पले मेमने कृत्रिम रूप से पाले गए मेमनों की तुलना में अधिक स्वस्थ रहते हैं और दूध छुड़ाने के बाद उनकी वृद्धि भी तेज होती है। मां अपने व्यवहार और विभिन्न प्रकार के संचार के माध्यम से मेमनों को सामाजिक व्यवहार तथा सफल वयस्क जीवन के लिए आवश्यक कौशल सीखने में सहायता करती है।