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जीबीयू में जुटीं 108 देशों की बेटियां, अंतरिक्ष में उड़ान भरने को तैयार होगा ‘शक्तिसैट’

जीबीयू में जुटीं 108 देशों की बेटियां, अंतरिक्ष में उड़ान भरने को तैयार होगा ‘शक्तिसैट’

रवि शर्मा , गौतमबुद्ध नगर : राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में रविवार से शुरू हो रहा ‘मिशन शक्तिसैट’ कार्यक्रम अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक अनूठी और ऐतिहासिक पहल साबित होने जा रहा है। सात दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत सहित 108 देशों की छात्राएं हिस्सा लेंगी और विशेषज्ञ वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में सैटेलाइट निर्माण से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है, जबकि प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रह सकते हैं।

स्पेस किड्ज इंडिया और इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर (IN-SPACe) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में दुनिया के विभिन्न देशों से चयनित छात्राएं भाग ले रही हैं। इनमें भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, दक्षिण अफ्रीका, ईरान, इटली, म्यांमार, नामीबिया, नेपाल, जॉर्डन, न्यूजीलैंड, मैक्सिको, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, श्रीलंका, हंगरी, तुर्की, पोलैंड, फिलीपींस, केन्या, ब्राजील, अफगानिस्तान, कनाडा, फिजी, नीदरलैंड, थाईलैंड और जिम्बाब्वे समेत कुल 108 देशों की छात्राएं शामिल होंगी। प्रत्येक देश से दो प्रतिभागियों का चयन किया गया है। भारत से उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, नागालैंड, छत्तीसगढ़ और जम्मू-कश्मीर सहित विभिन्न राज्यों की छात्राओं को कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। इनमें अधिकांश छात्राएं ग्रामीण, आदिवासी और सीमित संसाधनों वाले समुदायों से आती हैं, जिन्हें विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित में उनकी रुचि और प्रतिभा के आधार पर चुना गया है।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को ‘शक्तिसैट लो अर्थ ऑर्बिट मिशन’ और ‘शक्तिसैट मून मिशन’ की अवधारणा पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। छात्राएं सैटेलाइट डिजाइन, पेलोड डेवलपमेंट, सिस्टम इंटीग्रेशन, टेस्टिंग और स्पेस डिप्लॉयमेंट जैसी प्रक्रियाओं को करीब से समझेंगी। जीबीयू के 50 विद्यार्थियों को भी इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।

मिशन शक्तिसैट में इसरो के कई वरिष्ठ और पूर्व वैज्ञानिक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे। इनमें आईएसटीआरएसी के पूर्व निदेशक डॉ. रामकृष्णन, यूआरएससी के पूर्व निदेशक डॉ. पी. सुब्बा राव, इंटीग्रेशन एंड टेस्टिंग लेबोरेटरी के निदेशक डॉ. आलोक श्रीवास्तव, इसरो लियोस की पूर्व एसोसिएट डायरेक्टर कल्पना अरविंद, डिप्टी डायरेक्टर डॉ. राजेंद्र ए., अंजू दामोदरन, पुनीत कुमार मिश्रा और अन्य विशेषज्ञ शामिल हैं। इनके मार्गदर्शन में छात्राएं सैटेलाइट निर्माण की तकनीकी बारीकियां सीखेंगी।

गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि भारत की बढ़ती अंतरिक्ष उपलब्धियां युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही हैं। उन्होंने कहा कि मिशन शक्तिसैट केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि विज्ञान, नवाचार और महिला सशक्तिकरण का वैश्विक अभियान है। यह पहल छात्राओं को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी और उन्हें भविष्य के वैज्ञानिक, इंजीनियर तथा स्पेस टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ बनने का अवसर प्रदान करेगी।

108 देशों की भागीदारी के साथ आयोजित यह कार्यक्रम ग्रेटर नोएडा और गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। साथ ही यह भारत की उस सोच को भी मजबूत करेगा, जिसमें विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देकर भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए नई पीढ़ी तैयार की जा रही है।