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बेमौसम वर्षा ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, धान और सरसों की फसल चौपट

बेमौसम वर्षा ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, धान और सरसों की फसल चौपट
  • कटाई के लिए तैयार धान खेतों में बिछा, जलभराव से सरसों के बीज सड़ने का खतरा
  • दिल्ली, एनसीआर में वर्षा से जनजीवन और खेती प्रभावित

डिजिटल डेस्क, दिल्ली-एनसीआर। दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बेमौसम वर्षा ने दिल्ली-एनसीआर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल तेज वर्षा और जलभराव के कारण जमीन पर बिछ गई है, जबकि हाल ही में बोई गई सरसों की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। दिल्ली एनसीआर के ग्रामीण इलाकों के कृषि क्षेत्रों में भी मौसम के बदले मिजाज का असर देखने को मिल रहा है। किसानों को आशंका है कि खेतों में पानी जमा रहने से फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होंगी।

दिल्ली के ग्रामीण क्षेत्रों में धान की खेती मुख्य रूप से यमुना खादर और नजफगढ़ ड्रेन के आसपास के गांवों में होती है। बुराड़ी, अलीपुर, ढांसा, झटीकरा, कांगनहेड़ी और नानकहेड़ी जैसे इलाकों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के कारण धान की अच्छी पैदावार होती है। इस बार भी किसानों ने फसल तैयार करने में पूरी मेहनत की थी। फसल पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन लगातार वर्षा से खेतों में पानी भर गया। कई जगह धान की फसल जमीन पर गिर गई है। पानी में लंबे समय तक डूबी रहने से बालियों के दाने खराब होने की आशंका है।

सरसों की बुवाई पर भी संकट

दिल्ली के नजफगढ़, बवाना, नरेला और महरौली के कई ग्रामीण इलाकों में भूजल स्तर गहरा होने और पानी खारा होने के कारण किसान धान के बजाय सरसों की खेती को प्राथमिकता देते हैं। यहां किसानों ने हाल ही में सरसों की बुवाई की थी। लगातार वर्षा से खेतों में पानी भरने के कारण बीजों के अंकुरण पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि यदि खेतों में पानी लंबे समय तक जमा रहा तो दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है। इससे बीज, खाद और जुताई पर अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

ढांसा गांव के किसान सुखबीर सिंह के मुताबिक, धान की फसल पूरी तरह पक चुकी थी और अगले दो-तीन दिन में कटाई शुरू होनी थी। अचानक हुई वर्षा से खेतों में पानी भर गया और फसल जमीन पर बिछ गई। बालियों के दाने भी खराब होने लगे हैं। ऐसे में फसल की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।

वहीं, ऊजवा गांव के किसानों का कहना है कि उनके क्षेत्र में मीठे पानी की कमी के कारण सरसों की खेती प्रमुखता से की जाती है। कुछ दिन पहले ही बुवाई की गई थी, लेकिन वर्षा से खेतों में पानी भरने के कारण बीजों के सड़ने का खतरा बढ़ गया है। दोबारा बुवाई करनी पड़ी तो किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

किसानों ने मांगा मुआवजा

वर्षा से जहां किसानों की फसल प्रभावित हुई है, वहीं शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण से कुछ राहत मिली है। साथ ही भूजल रिचार्ज होने की संभावना भी बढ़ी है। हालांकि, किसानों के सामने फिलहाल फसल बचाने और आर्थिक नुकसान की भरपाई की चुनौती है।

किसानों ने दिल्ली सरकार और संबंधित जिला प्रशासन से प्रभावित गांवों में तत्काल विशेष गिरदावरी कराने की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम खेतों में पहुंचकर नुकसान का आकलन करे और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि वे आर्थिक संकट से उबरकर अगली फसल की तैयारी कर सकें।