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कैंसर के इलाज में एआइ और पर्सनलाइज्ड थेरेपी की बढ़ेगी भूमिका, 170 से अधिक विशेषज्ञों ने किया मंथन

कैंसर के इलाज में एआइ और पर्सनलाइज्ड थेरेपी की बढ़ेगी भूमिका, 170 से अधिक विशेषज्ञों ने किया मंथन
  • जीबीयू में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सीसीआइ 2026 शुरू, शुरुआती जांच से लेकर सीएआर-टी सेल थेरेपी तक पर हुई चर्चा

गौतमबुद्ध नगर, डिजिटल डेस्क : कैंसर के उपचार को अधिक सटीक और मरीजों की जरूरतों के अनुरूप बनाने में आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और व्यक्तिगत उपचार पद्धतियां अहम भूमिका निभा सकती हैं। कैंसर के निदान और उपचार की इन्हीं संभावनाओं पर चर्चा के लिए गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में बृहस्पतिवार को तीन दिवसीय 21वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘इमर्जिंग फ्रंटियर्स इन कैंसर रिसर्च’ (सीसीआइ 2026) का शुभारंभ हुआ। स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (एसओबीटी) की ओर से आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के 170 से अधिक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, चिकित्सक, शिक्षाविद और विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन की थीम ‘मॉलिक्यूलर मैकेनिज्म्स टू पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट्स’ रखी गई है।

सम्मेलन में कैंसर की रोकथाम, शुरुआती पहचान, आणविक स्तर पर बीमारी को समझने और मरीजों की जरूरत के अनुसार उपचार विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में सम्मेलन स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आइआइएसईआर), भोपाल के पूर्व निदेशक प्रो. गोवर्धन दास ने कैंसर की शुरुआती पहचान, रोकथाम और क्लिनिकल रिसर्च के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कैंसर के प्रभावी प्रबंधन के लिए समय पर निदान और अनुसंधान आधारित उपचार रणनीतियां महत्वपूर्ण हैं।

अमेरिका के लुंडक्विस्ट इंस्टीट्यूट के डॉ. संतोष केसरी ने प्रमुख व्याख्यान दिया। जीबीयू के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का समाधान खोजने में वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच सहयोग जरूरी है। उन्होंने कैंसर अनुसंधान में साझा प्रयासों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

शिव नादर इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस के प्रो-वाइस चांसलर प्रो. संजीव गलांडे ने कैंसर के आधुनिक उपचारों पर चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से अग्नाशय कैंसर (पैंक्रियाटिक कैंसर) पर चल रहे शोध और सीएआर-टी सेल थेरेपी जैसी उन्नत उपचार तकनीकों की जानकारी दी।

पारंपरिक चिकित्सा पांडुलिपियों की प्रदर्शनी

सम्मेलन में चिकित्सा के ऐतिहासिक विकास को दर्शाने के लिए पुरानी चिकित्सा पद्धतियों से जुड़ी पांडुलिपियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें उपचार की पारंपरिक विधियों और चिकित्सा विज्ञान में समय के साथ हुए बदलावों को प्रदर्शित किया गया है। बाली से आए डॉ. सुगीलानुस ने पारंपरिक औषधीय पांडुलिपियों के संरक्षण की आवश्यकता पर विचार रखे। प्रो. राजीव वार्ष्णेय और प्रो. एस. धनलक्ष्मी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में डॉ. रेखा पुरिया मौजूद रहीं।

सम्मेलन का उद्देश्य कैंसर अनुसंधान में वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना, नवीन शोध निष्कर्षों का आदान-प्रदान करना और निदान एवं उपचार में उभरती तकनीकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करना है।