डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर: सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का जायजा लेने पहुंचे काक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरभ दास और उनकी टीम को मंगलवार को विरोध का सामना करना पड़ा। टीम देवला, मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर स्थित सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने पहुंची थी, लेकिन तीनों स्थानों पर टीम के सदस्यों को स्कूल परिसर के अंदर प्रवेश नहीं मिल सका। देवला गांव में स्कूल के बाहर पुलिस भी तैनात रही। इस दौरान टीम और ग्रामीणों के बीच नोकझोंक का वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
सौरभ दास के नेतृत्व में टीम का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिल रही सुविधाओं का मौके पर जाकर आकलन करना था। टीम स्कूलों में कक्षाओं, शौचालय, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी व्यवस्थाओं की स्थिति देखना चाहती थी। टीम का कहना है कि इससे पहले उसे नोएडा के गढ़ी चौखंडी स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश मिला था और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया था। इसके बाद टीम ने अन्य सरकारी स्कूलों का निरीक्षण करने की योजना बनाई थी।
बीएसए के आदेश का हवाला देकर रोका प्रवेश
इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में टीम के सदस्य स्कूल के शिक्षकों से अंदर प्रवेश नहीं मिलने का कारण पूछते दिखाई दे रहे हैं। शिक्षकों की ओर से बताया गया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) का निर्देश है कि बाहरी लोगों को स्कूल में प्रवेश न दिया जाए। शिक्षकों ने पढ़ाई बाधित होने का भी हवाला दिया।
इसके बाद सौरभ दास ने स्कूलों की व्यवस्थाओं के साथ ही निरीक्षण की अनुमति नहीं मिलने पर सवाल उठाए। उन्होंने इंटरनेट मीडिया पोस्ट में कहा कि स्कूलों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है, लेकिन सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखने से किसी को क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और स्कूलों के आसपास की स्थिति का भी मुद्दा उठाया।
देवला में ग्रामीणों से हुई नोकझोंक
देवला गांव में निरीक्षण को लेकर टीम और स्थानीय ग्रामीण आमने-सामने आ गए। प्रसारित वीडियो में ग्रामीण सौरभ दास और उनकी टीम से सवाल करते नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूलों में सुविधाएं बेहतर हैं और यदि कोई समस्या है तो स्थानीय स्तर पर शिकायत की जा सकती है। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस हुई।
वीडियो में कुछ लोगों के बीच धक्कामुक्की भी दिखाई दे रही है। स्थिति बिगड़ने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया। ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि बाहरी लोगों को स्कूलों की जांच करने का अधिकार किसने दिया है।
देवला में रास्ते और गंदगी का मुद्दा उठा
स्कूल के निरीक्षण के साथ सौरभ दास ने देवला गांव में स्कूल तक जाने वाले रास्ते और आसपास की साफ-सफाई को लेकर भी सवाल उठाए। इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक अन्य वीडियो में वह बच्चों से बातचीत करते हुए स्कूल आने-जाने के रास्ते के बारे में जानकारी लेते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने रास्ते में गंदगी और जलभराव जैसी समस्याओं का मुद्दा उठाया।
इस दौरान ग्रामीणों ने गांव में विकास कार्यों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को लेकर भी अपनी शिकायतें रखीं। सौरभ दास ने क्षेत्रीय विकास और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।
मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर में सुविधाएं बेहतर होने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि मकौड़ा और जैतपुर वैशपुर स्थित सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। उनका दावा है कि स्कूलों में पढ़ाई के साथ अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं भी ठीक हैं और छात्रों को निजी स्कूलों की तर्ज पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं देवला गांव में स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर ग्रामीणों ने परेशानी की बात कही।
बीएसए बोले- 20 से 25 लोगों की भीड़ को स्कूल में प्रवेश देना संभव नहीं
बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने कहा कि स्कूल में प्रवेश पर सामान्य रूप से कोई रोक नहीं है। हालांकि 20 से 25 लोगों की भीड़ को एक साथ स्कूल परिसर में प्रवेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसी वजह से मंगलवार को स्कूलों में पहुंचे लोगों को प्रवेश नहीं दिया गया। बीएसए के अनुसार, स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण बनाए रखना विभाग की प्राथमिकता है।
