डिजिटल डेस्क, कानपुर : सीएम ग्रिड योजना के तहत बन रही सड़कों के निर्माण में हो रही देरी अब प्रशासनिक हलकों में गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। इसी को लेकर सर्किट हाउस में एक अहम समीक्षा बैठक बुलाई गई, जिसमें नगर विकास विभाग के विशेष सचिव महेंद्र बहादुर सिंह, नगर आयुक्त, सांसद रमेश अवस्थी, महापौर प्रमिला पांडे, विधायक नीलिमा कटियार और विधायक सुरेंद्र मैथानी मौजूद रहे। मेयर ने कहा कि इस तरह की स्थिति से सरकार की बदनामी हो रही है। उन्होंने अधिकारियों से शहर की समस्याओं पर गंभीरता से काम करने की बात कही है।
कानपुर। सीएम ग्रिड योजना के तहत बन रहीं सड़कों के लिए गुरुवार को सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में योजना की पहली किश्त के तहत बन रही पांच सड़कों की सुस्त रफ्तार पर अधिकारियों ने कड़ी नाराजगी जताई। हालत यह है कि तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद काम अभी अधूरा पड़ा है, जिसका खामियाजा शहरवासी रोज़ाना जाम और धूल-गर्द के रूप में भुगत रहे हैं। महापौर ने अधिकारियों पर कार्यालयों से बाहर नहीं निकलने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें सड़कों पर निकलकर स्थिति देखनी चाहिए और अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जलभराव के समय वह पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कानपुर में नहीं थीं। अब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए लिखित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को बताना चाहिए कि इतने लंबे समय तक काम क्यों लंबित रहा। महापौर ने अधिकारियों से फील्ड में जाकर शहर की स्थिति देखने और समस्याओं का मौके पर समाधान कराने की बात कही है ।
जनता का BJP पर भरोसा उसे बनाए रखना जिम्मेदारी- रमेश अवस्थी
बैठक के बाद महापौर प्रमिला पांडे का गुस्सा ठेकेदारों और कार्यदायी संस्था पर फूट पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि शासन से जैसे ही सख्ती की खबर पहुंची, वैसे ही रातों-रात सड़कें बनने लगीं, यानी काम पहले भी हो सकता था, पर जानबूझकर लटकाया जा रहा था। महापौर ने यह भी बताया कि शासन से आए अधिकारी विशेष रूप से सीएम ग्रिड सड़कों की प्रगति जानने ही आए थे। बैठक में सांसद रमेश अवस्थी ने भी दो टूक कहा कि अगर सड़कें समय पर नहीं बनीं तो जनता की नाराज़गी और गालियां आखिरकार जनप्रतिनिधियों को ही झेलनी पड़ेंगी। उन्होंने कहा कि जनता का भाजपा पर जो भरोसा है, उसे बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी है।
*पैसों की कोई कमी नहीं, फिर देरी क्यों?- महापौर
महापौर ने बताया कि योजना के लिए अब तक दो किश्तें जारी हो चुकी हैं। दिलचस्प बात यह है कि पहली किश्त के टेंडर में ही 33-34 करोड़ रुपये बच गए थे, इसके बावजूद 15वें वित्त आयोग से अतिरिक्त 35 करोड़ रुपये और लगाए जा रहे हैं। यानी बजट की कोई तंगी नहीं, फिर भी काम रेंग-रेंगकर चल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद स्पष्ट कर चुके हैं कि विकास कार्यों के लिए धन की कमी नहीं है, बस काम जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि जहां सड़क बने, वहां फुटपाथ का निर्माण भी साथ-साथ हो। बैठक के अंत में कार्यदायी संस्था ने आश्वासन दिया है कि सभी पांचों सड़कों का काम 30 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। अब देखना यह होगा कि यह डेडलाइन सिर्फ कागज़ों तक सीमित रहती है, या शहरवासियों को सच में जाम और धूल से राहत मिलती है।
