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आल इंडिया टूरिस्ट परमिट की आड़ में नियमों की अनदेखी कर यात्रियों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़

आल इंडिया टूरिस्ट परमिट की आड़ में नियमों की अनदेखी कर यात्रियों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़
  • निर्धारित स्टापेज से इतर यात्रियों को बैठाने-उतारने और बसों में सामान लादने के आरोप, हादसों के बाद चालान तक सिमट जाती है कार्रवाई

डिजिटल डेस्क, दिल्ली एनसीआर: आल इंडिया टूरिस्ट परमिट की आड़ में लंबे रूट पर संचालित होने वाली बसों में परिवहन नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। आरोप है कि परमिट में दर्ज रूट और निर्धारित स्टापेज की शर्तों के बावजूद बस संचालक रास्ते में मनमाने ढंग से यात्रियों को बैठाते और उतारते हैं। इतना ही नहीं, बसों में क्षमता से अधिक यात्रियों के साथ सामान की ढुलाई भी किए जाने की शिकायतें हैं। ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिवहन विभाग के जानकारों के मुताबिक आल इंडिया टूरिस्ट परमिट के तहत संचालित बसों के लिए निर्धारित रूट और स्टापेज की जानकारी देना जरूरी है। बस संचालकों को संबंधित विवरण आनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराना होता है। परमिट व्यवस्था का उद्देश्य पर्यटक वाहनों को देशभर में निर्बाध संचालन की सुविधा देना है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि बसों का संचालन स्टेज कैरिज की तरह मनमाने तरीके से किया जाए या उनमें माल ढोया जाए।

एप पर दर्ज जानकारी के बाहर भी संचालन का आरोप

नई दिल्ली, कश्मीरी गेट, आनंद विहार, सराय काले खां, कौशांबी, नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत एनसीआर के विभिन्न स्थानों से रोजाना बड़ी संख्या में बसें कानपुर, कानपुर देहात, लखनऊ, झांसी, हमीरपुर, महोबा, अयोध्या समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के अलावा बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान और मध्य प्रदेश के लिए रवाना होती हैं।

सूत्रों का आरोप है कि बस संचालक परमिट और एप पर निर्धारित रूट व स्टापेज की जानकारी अपडेट रखते हैं, लेकिन इसके अलावा भी आफलाइन बुकिंग के माध्यम से यात्रियों को बैठाया जाता है। कई बसों में सामान की बुकिंग किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। यदि बसें निर्धारित परमिट की शर्तों के विपरीत यात्रियों को उठाती-उतारती हैं या माल का परिवहन करती हैं तो यह परमिट की शर्तों के उल्लंघन के दायरे में आ सकता है।

हादसे के बाद चालान तक सिमटती है कार्रवाई

लंबे रूट पर संचालित बसों में नियमों के उल्लंघन के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के आरोप लगते रहे हैं। हादसा होने के बाद परिवहन विभाग की ओर से चालान या अन्य कार्रवाई की जाती है, लेकिन सवाल यह है कि नियमों का उल्लंघन लगातार होने से पहले निगरानी और प्रवर्तन क्यों नहीं हो पाता।

परिवहन नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन की स्थिति में परमिट के विरुद्ध कार्रवाई का प्रविधान है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 86 के तहत परमिट को निलंबित या निरस्त किए जाने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके बावजूद यदि वाहन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है तो नियमानुसार अन्य प्रवर्तन कार्रवाई भी की जा सकती है।

अलग-अलग परमिट की अलग व्यवस्था

स्टेज कैरिज परमिट : इस श्रेणी की बसें निर्धारित रूट पर संचालित होती हैं और मार्ग में निर्धारित स्थानों पर यात्रियों को चढ़ाने-उतारने की व्यवस्था होती है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 72 के तहत स्टेज कैरिज परमिट जारी किया जाता है।

कांट्रैक्ट कैरिज परमिट : किसी व्यक्ति, संस्था या समूह के साथ अनुबंध के आधार पर बस का संचालन किया जाता है। चार्टर्ड बसें इसी श्रेणी में आती हैं।

आल इंडिया टूरिस्ट परमिट : पर्यटक वाहन निर्धारित शर्तों के तहत देशभर में संचालित किए जा सकते हैं। केंद्र सरकार के 2023 के आल इंडिया टूरिस्ट व्हीकल्स परमिट नियमों का उद्देश्य वैध परमिट वाले पर्यटक वाहनों को देशभर में निर्बाध संचालन की सुविधा देना है। हालांकि ऐसे वाहनों में नियमों के विपरीत माल ढुलाई नहीं की जा सकती।

प्राइवेट सर्विस व्हीकल परमिट : कंपनी, फैक्ट्री, संस्था या स्कूल अपने कर्मचारियों अथवा विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के लिए ऐसे वाहनों का संचालन करते हैं।

तीन दिन चलेगा विशेष अभियान

एआरटीओ प्रवर्तन अभिषेक कनौजिया ने बताया कि पूर्व में अभियान चलाकर तीन दिनों के दौरान करीब 50 बसों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। उन्होंने बताया कि नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ 28 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाया जाएगा। जांच के दौरान परमिट, रूट, स्टापेज, यात्रियों की संख्या और अन्य निर्धारित मानकों की जांच की जाएगी।

इन बिंदुओं पर उठ रहे सवाल

  • क्या परमिट में दर्ज स्टापेज के बाहर यात्रियों को बैठाया और उतारा जा रहा है?
  • बसों में आफलाइन बुकिंग और सामान की ढुलाई पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हो पा रही?
  • क्षमता से अधिक यात्रियों की शिकायतों पर नियमित कार्रवाई क्यों नहीं होती?
  • गंभीर उल्लंघन के मामलों में केवल चालान तक कार्रवाई सीमित क्यों रहती है?
  • हादसे के बाद ही प्रवर्तन विभाग की सक्रियता क्यों बढ़ती है?