सिमकार्ड अपग्रेड करने के नाम पर 100 करोड़ की ठगी के दो अरोपी गिरफ्तार

- 44 स्मार्टफोन और दूरसंचार कंपनी की ब्रांडेड टी-शर्ट व कैप के साथ बंगाल से धरे गए अपराधी
डिजिटल डेस्क : दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 4G से 5G में सिमकार्ड अपग्रेड करने के बहाने देशभर के 124 लोगों से 100 करोड़ से अधिक की साइबर ठगी करने में संलिप्त जामताड़ा माड्यूल के एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर सिंडिकेट के दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार किए। टीम ने आरोपियों को बंगाल के दुर्गापुर इलाके से गिरफ्तार किया। आरोपियों के पास से 44 स्मार्टफोन, दूरसंचार कंपनी की ब्रांडेड टी-शर्ट व कैप बरामद हुई है।
डीसीपी आदित्य गौतम के मुताबिक गिरफ्तार किए साइबर ठगों में अंकित दास (मुख्य आपरेटर) मूल रूप से जामताड़ा (झारखंड) का रहने वाला है। अंकित पहले भी 2021 में फरीदाबाद के साइबर ठगी मामले में गिरफ्तार हुआ था। सुबल दास, अंकित दास का चचेरा भाई है, वह एक साल से भाई के साथ मिलकर पीड़ितों को झांसे में लेने के लिए काल कर रहा था। बीते 24 जून को साइबर सेल क्राइम ब्रांच में दर्ज E-FIR के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि फर्जी टेलीकाम कर्मचारियों ने E-SIM कन्वर्ट करने के नाम पर उनसे संपर्क किया और उनके बैंक खातों से 40.90 लाख की अनधिकृत निकासी कर ली।
इन राज्यों में फैला है गिरोह का नेटवर्क
दिल्ली, कर्नाटक, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा और तेलंगाना समेत कई राज्यों के लोगों को शिकार बना चुका है। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों, बैंक खाता मुहैया कराने वाले सहयोगियों और पूरे मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन) का पता लगाने के लिए आगे की जांच कर रही है। गिरोह दिल्ली, कर्नाटक, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बंगाल, आंध्र प्रदेश, बिहार, ओडिशा और तेलंगाना समेत कई राज्यों के लोगों को शिकार बना चुका है।
इस तरह से करते थे ठगी
बता दें कि आरोपी वीडियो काल के दौरान पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए टेलीकाम कंपनियों के ब्रांडेड लाल कपड़े (टी-शर्ट और कैप) पहनते थे और रोजाना लगभग 200 लोगों को काल करते थे। वे खुद को टेलीकाम कंपनी का प्रतिनिधि बताकर 4-G से 5-G ई-सिम में मुफ्त अपग्रेड करने का आफर देते थे। जैसे ही पीड़ित E-SIM की प्रक्रिया के लिए सहमत होते थे, आरोपित अपने डिवाइस पर पीड़ित का मोबाइल नंबर एक्टिवेट कर लेते थे। नंबर का एक्सेस मिलते ही पीड़ित के बैंक खातों के OTP और आथेंटिकेशन कोड आरोपितों के पास आने लगते थे। इसके बाद वे पैसे अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। पूछताछ में अंकित दास ने बताया कि ठगी की वारदात को अंजाम देने के बाद वह साक्ष्य मिटाने के लिए इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन को दामोदर नदी में फेंक देता था।