इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी से डेरी गायों की सेहत और उत्पादकता की आसानी से हो सकती है निगरानी

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रवि शर्मा, उत्तर प्रदेश : आधुनिक डेरी फार्मिंग में गायों के स्वास्थ्य, भावनात्मक स्थिति और उत्पादकता की निगरानी के लिए इन्फ्रारेड थर्मोग्राफी (आइआरटी) एक प्रभावी और गैर-आक्रामक तकनीक के रूप में उभर रही है। GBU में आयोजित ISAE-2026 के कार्यक्रम में एक प्लेनरी टाक में राजशाही विश्वविद्यालय, बांग्लादेश के पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डा. जशिम उद्दीन ने इसके संभावित उपयोग और शोध निष्कर्षों को पेश किया।

डा. जशिम उद्दीन ने अपने पीएचडी अध्ययन के तहत आस्ट्रेलिया स्थित क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में डा. डेविड मैकनील और प्रोफेसर क्लाइव फिलिप्स के मार्गदर्शन में शोध किया। डा. उद्दीन ने बताया कि आइआरटी के माध्यम गायों के शरीर के तापमान में होने वाले बेहद सूक्ष्म बदलावों की पहचान की जा सकती है। यह बदलाव तनाव, चिंता या आराम जैसी भावनात्मक अवस्थाओं से जुड़े हो सकते हैं। तकनीक की खासियत है कि इसके लिए पशु को पकड़ने या शारीरिक रूप से नियंत्रित करने की जरूरत नहीं होती है।

गायों में चिंता से जुड़े व्यावहारिक संकेत देखे गए :

शोध में सामने आया है कि अपरिचित हैंडलर, वातावरण में बदलाव या अन्य तनाव कारकों का सामना करने वाली गायों में आंखों का तापमान बढ़ा हुआ पाया गया। ऐसी गायों में चिंता से जुड़े व्यावहारिक संकेत भी देखे गए। इसके साथ ही उनके दूध में वसा की मात्रा में कमी दर्ज की गई। इससे पशु की भावनात्मक स्थिति और दूध उत्पादन की गुणवत्ता के बीच संभावित संबंध का संकेत मिलता है।

IRT के माध्यम से दूर से की जा सकती है निगरानी :

पारंपरिक तरीकों में व्यवहार का लगातार निरीक्षण या हार्मोन का विश्लेषण शामिल है। ये तरीके कई बार समय लेने वाले और श्रम-साध्य होते हैं। वहीं IRT के माध्यम से दूर से ही गायों की निगरानी की जा सकती है। इससे पशुओं पर अतिरिक्त तनाव कम होने के साथ मानव-पशु संपर्क भी घटता है।

समय पर पहचान से किसान कर सकेंगे बचाव :

शोध के मुताबिक, थर्मल इमेजिंग के जरिये तनाव या परेशानी के शुरुआती संकेतों की पहचान होने पर किसान समय रहते आवश्यक कदम उठा सकते हैं। इससे पशु कल्याण बेहतर करने के साथ झुंड प्रबंधन और फार्म की उत्पादकता में सुधार की संभावना है। अध्ययन में आइआरटी के प्रभावी इस्तेमाल के लिए नमूना आकार और माप प्रोटोकाल से संबंधित व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तकनीक को डेरी फार्मों में नियमित निगरानी के लिए अपनाया जाता है तो यह पशु कल्याण के साथ-साथ दूध उत्पादन और झुंड प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।