- प्रेरणा विमर्श-2026 ‘उत्कर्ष’ में स्वाभिमानी नारी और युवा सोच पर हुआ मंथन
- वक्ताओं ने कहा- परिवार में संस्कार और युवाओं में सकारात्मक सोच से बनेगा सशक्त राष्ट्र
डिजिटल डेस्क, गौतमबुद्ध नगर: गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में रविवार को प्रेरणा विमर्श-2026 ‘उत्कर्ष’ का आयोजन किया गया। इस वर्ष आयोजन की थीम ‘नारी सम्मान और युवा स्वाभिमान’ रही। कार्यक्रम में सृजन संवाद के तहत ‘स्वाभिमानी नारी, सशक्त भारत’ और ‘युवा सोच, नया भारत’ विषय पर दो समानांतर सत्र आयोजित किए गए। इनमें लेखक, पत्रकार, शिक्षाविद् और प्रबुद्ध विचारकों ने नारी सशक्तीकरण, परिवार, संस्कार, युवा शक्ति, तकनीक और राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और गुरुकुल के विद्यार्थियों के स्वस्तिवाचन से हुआ। सत्र संयोजक अखिलेश चौधरी ने स्वागत भाषण में कहा कि स्वाभिमानी नारी राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। मां बच्चे की प्रथम गुरु होती हैं और उनके संस्कार व आचरण से ही चरित्र का निर्माण होता है।
परिवार से मजबूत होगा समाज
‘स्वाभिमानी नारी, सशक्त भारत’ विषयक सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि परिवार समाज को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण इकाई है। भारतीय संस्कार और परंपराएं परिवार को मजबूत बनाने का काम करती हैं। नई पीढ़ी तक संस्कार पहुंचाने में परिवार की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। दादी, नानी और चाची के माध्यम से पीढ़ियों तक संस्कार पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि पुरुषों को महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए। परिवार जैसा होगा, वैसा ही समाज और राष्ट्र का स्वरूप बनेगा।
प्रसिद्ध योग विशेषज्ञ निवेदिता जोशी ने कहा कि महिलाओं की जिम्मेदारियां केवल उनके अधिकारों के आधार पर तय नहीं होनी चाहिए। खाना बनाना और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी केवल महिलाओं की ही है, इस सोच में बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक बदलाव के लिए महिलाओं की मानसिक शक्ति को मजबूत करना आवश्यक है। मानसिक रूप से सशक्त महिला ही अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकती है।
भविष्य प्रौद्योगिकी प्रबंधन निदेशालय की निदेशक रंजना मल्लामल्ली ने कहा कि परिवार का सहयोग मिले बिना कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग नहीं कर सकता। महिलाओं के लिए परिवार के साथ सामंजस्य बनाना और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं तकनीक से लेकर उद्यमिता तक हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं। आधी आबादी के लिए यह अवसरों का महत्वपूर्ण दौर है। यदि लक्ष्य बड़ा और कठिन हो तो उसे हासिल करने में सहयोग भी मिलता है। नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सृजन और नए विश्व के निर्माण की शक्ति है। मां ही बच्चे की पहली गुरु होती है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रदीप ने दिया।
युवाओं को समय के साथ बदलने की जरूरत
दूसरे समानांतर सत्र ‘युवा सोच, नया भारत’ में युवाओं की भूमिका, तकनीक और नवाचार पर चर्चा हुई। सत्र में इस बात पर मंथन किया गया कि युवा सही दिशा में कैसे आगे बढ़ें और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यबोध को मजबूत करते हुए एआइ के दौर में सकारात्मक सोच तथा नवाचार के जरिए राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें। सत्र का संचालन सीएमएस गाजियाबाद के प्रो. डॉ. अनिल निगम ने किया।
आईएमटी ग्रुप आफ कालेज के प्रबंध निदेशक डॉ. मयंक अग्रवाल ने कहा कि युवाओं को समय के साथ तालमेल बिठाने के लिए तेजी से सीखना होगा। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। युवाओं को समाज में मौजूद प्रेरणादायक व्यक्तित्वों से सीख लेकर उन्हें अपना प्रेरणास्रोत बनाना चाहिए।
युवाओं को समाज में हो रहे बदलावों पर नजर रखने की जरूरत है। सोशल मीडिया पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दबाव में आने के बजाय डिजिटल जागरूकता को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफलता हासिल करने के साथ ही समझ और ज्ञान को विकसित करना भी जरूरी है।
भाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। युवाओं को लगातार पढ़ने और लिखने की आदत विकसित करनी चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए भाषा सीखने की अपनी जिजीविषा के बारे में भी बताया।
सत्र का संचालन डॉ. नीलम ने किया और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. हरेंद्र सिंह ने किया। वैशाली मित्तल ने युवाओं और नारी शक्ति पर स्वरचित कविता प्रस्तुत की। समापन अवसर पर वंशिका सेठी ने वंदे मातरम का गान किया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा विमर्श-2026 आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. अनिल त्यागी, कार्यकारी अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, संयोजक श्याम किशोर, सचिव मोनिका चौहान, सत्र संयोजक अखिलेश चौधरी सहित अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

