डिजिटल डेस्क , यूपी टीम: कानपुर में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें व्हाट्सएप चैट के जरिए करोड़ों रुपये के फर्जी दवा कारोबार का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली में नकली वैक्सीन पकड़े जाने के बाद मिले इनपुट के आधार पर कानपुर में 3 संदिग्ध फर्मों पर FIR दर्ज की है। जांच में सामने आया है कि इन फर्मों के माध्यम से फर्जी बिलिंग का सहारा लेकर नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन की सप्लाई की जा रही थी। वैक्सीन की मूल निर्माता कंपनी ने इन बैचों को अपना उत्पाद मानने से साफ इनकार कर दिया है।
दिल्ली में पकड़ी गई कथित नकली रेबीज वैक्सीन का कनेक्शन कानपुर से जुड़ा है। कानपुर कुत्ते के काटने पर जिस एंटी-रेबीज वैक्सीन को लोग जान बचाने की आखिरी उम्मीद मानते हैं। उसी के नाम पर कानपुर के दवा बाजार में मौत का कारोबार फल-फूल रहा था। दिल्ली पुलिस और स्थानीय औषधि विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है, जिसके तार दिल्ली के भागीरथ पैलेस से लेकर कानपुर के सबसे बड़े दवा बाजार बिराना रोड तक फैले हैं। मामले में कलक्टरगंज थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। ड्रग इंस्पेक्टरों ने इन टीकों के सैंपल लैब जांच के लिए भेजे हैं और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है।
दिल्ली से खुली पोल
पूरे खेल की शुरुआत दिल्ली के भागीरथ पैलेस से हुई, जहां ‘अभयरैब’ नाम की एंटी-रेबीज वैक्सीन पकड़ी गई। निर्माता कंपनी ने जांच के बाद साफ कर दिया कि यह वैक्सीन उसकी नहीं, बल्कि पूरी तरह नकली है। दिल्ली ड्रग कंट्रोल विभाग ने जब नकली खेप का सुराग खंगाला, तो जांच की सुई कानपुर के बिरहाना रोड स्थित न्यू आरजे एजेंसी पर आकर टिक गई। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने आधी रात को कानपुर में दबिश दी और शहर में हड़कंप मच गया। पुलिस फर्म संचालक राजिन्दर सिंह (हरजिंदर सिंह) को हिरासत में लेकर दिल्ली रवाना हो गई।
एक-दूसरे पर दोष
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद कानपुर औषधि विभाग की टीम भी हरकत में आई और न्यू आरजे एजेंसी तथा एक अन्य फर्म एलिक्सिर क्योर पर शिकंजा कसा। पूछताछ में आरोपी एक-दूसरे पर दोष मढ़ने लगे। न्यू आरजे एजेंसी के राजिन्दर सिंह ने दावा किया कि उसने नकली दवा एलिक्सिर क्योर के मालिक तरनदीप सिंह से खरीदी थी। इधर तरनदीप ने ड्रग इंस्पेक्टर के सामने सफेद झूठ बोलते हुए कह दिया कि उसने यह दवा कभी बेची ही नहीं।
व्हाट्सएप चैट से खुलासा
राजिन्दर ने अपना मोबाइल निकालकर ड्रग इंस्पेक्टर ओमपाल सिंह को व्हाट्सएप चैट दिखा दी। चैट में साफ नजर आया कि तरनदीप खुद फर्जी बिल भेज रहा था। ड्रग इंस्पेक्टर ने उसी नंबर पर तुरंत कॉल लगाई, जिसे तरनदीप ने उठा लिया और इस तरह उसके झूठ की कलई खुल गई।
आगरा से लौटाई गईं 839 शीशियां गायब
मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आगरा की एक फर्म ने नकली होने के शक में 839 शीशियां राजिन्दर सिंह को वापस की थीं। जांच के दौरान वह यह नहीं बता सका कि ये शीशियां कहां गायब कर दी गईं। आशंका है कि ये शीशियां बाजार में खप गईं तो कितनी जिंदगियां दांव पर लगी होंगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं। रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसके लक्षण उभरने के बाद इलाज लगभग असंभव माना जाता है और बचाव का एकमात्र सहारा समय पर लगी असली वैक्सीन ही है। मानव जीवन से खिलवाड़ और नकली दवाएं बेचने के इस गंभीर अपराध में औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे की तहरीर पर न्यू आरजे एजेंसी की बलजीत कौर, राजिन्दर सिंह और एलिक्सिर क्योर के तरनदीप सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। एसडीएम सौरभ सिंह ने बताया कि दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन पकड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने कानपुर में छापेमारी कर एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। इसके बाद ड्रग विभाग की टीम ने जांच की और जांच पूरी होने के उपरांत मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
